पाठ 15
महिमान्वित ईसा
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ईसा का दूसरा आगमन
ईसा ने कहा, ‘‘मेरे पिता के यहाँ बहुत-से निवास स्थान हैं। मैं तुम्हारे लिए स्थान का प्रबंध करने जाता हूँ। मैं वहाँ जा कर तुम्हारे लिए स्थान का प्रबंध करने के बाद फिर आऊँगा और तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊॅँगा, जिससे जहाॅँ मैं हूँ वहाँ तुम भी रहो’’ (योहन 14: 2-3)। पिता के दाहिने विराजमान ईसा हमें स्वर्ग ले जाने के लिए दुबारा आने का वादा करते हैं। ईसा चाहते हैं कि जहाँ वे हैं वहाँ हम - उनके षिश्य - भी हों। वे दुबारा इसलिये आते हैं कि हर एक को अपने कर्म के अनुसार प्रतिफल देने के लिए वे फिर आते हैं। धर्मियों को अनन्त जीवन और कुकर्मियों को अनन्त दण्ड का प्रतिफल मिलेगा।
अंतिम न्याय
‘‘जब मानव पुत्र सब स्वर्गदूतों के साथ अपनी महिमा सहित आयेंगे तो वे अपने महिमामय सिंहासन पर विराजमान होंगे । सभी राश्ट्र उनके सम्मुख एकत्र किये जायेंगे। वे धर्मियों को अपने दायें और कुकर्मियों को अपने बायें खड़ा कर देंगे। तब वे अपने दायें के लोगों से कहेंगे, ‘‘मेरे पिता के कृपापात्रो, आओ और उस राज्य के अधिकारी बनो, जो संसार के प्रारंभ से तुम लोगों के लिए तैयार किया गया है; क्योंकि मैं भूखा था और तुमने मुझे खिलाया; मैं प्यासा था और तुमने मुझे पिलाया; मैं परदेषी था और तुमने मुझे अपने यहाँ ठहराया; मैं नंगा था और तुमने मुझे पहनाया; मैं बीमार था और तुम मुझ से भेंट करने आये; मैं बन्दी था और तुम मुझसे मिलने आये।’’
तब धर्मी उनसे कहेंगे, ‘‘प्रभु, हमने कब आप को भूखा देखा और खिलाया ?कब प्यासा देखा और पिलाया ?हमने कब आप को परदेषी देखा और अपने यहाँ ठहराया ?कब नंगा देखा और पहनाया ?कब आप को बीमार या बन्दी देखा और आप से मिलने आये ?’’ राजा उन्हें यह उत्तर देंगे, ‘‘मैं तुम लोगों से यह कहता हूँ - तुमने मेरे इन भाइयों में से किसी एक के लिए, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो, जो कुछ किया, वह तुमने मेरे लिए ही किया‘’ (मत्ती 25: 31-40) ।
‘‘तब वे अपने बायें के लोगों से कहेंगे, ‘‘षापितो, मुझसे दूर हट जाओ। उस अनन्त आग में जाओ, जो षैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गयी है; क्योंकि मैं भूखा था और तुम लोगों ने मुझे नहीं खिलाया; मैं प्यासा था और तुमने मुझे नहीं पिलाया।... जो कुछ तुमने मेरे इन छोटे-से छोटे भाइयों में से किसी एक के लिए नहीं किया, वह तुमने मेरे लिए भी नहीं किया। ये अनन्त दण्ड भोगने जायेंगे, परन्तु धर्मी अनन्त जीवन में प्रवेष करेंगे’’ (मत्ति 25: 41 - 46)। अंतिम न्याय के दिन भातृप्रेम के आधार पर ही हम पुरस्कार या दण्डाज्ञा के योग्य बनेंगे। जो भलाई या बुराई हम दूसरों के प्रति करते हैं वह ऐसी मानी जाएगी मानो हमने प्रभु के प्रति की हो। हमारे कर्म ही हमें पुरस्कार या दण्डाज्ञा के योग्य बनाते हैं। जो भलाई करते हैं उन्हें स्वर्ग सौभाग्य और जो बुराई करते हैं उन्हें अनन्त दण्ड मिलेगा। उपुर्यक्त पवित्र वचन हमें सिखाते हैं कि हमें केवल बुराई नहीं करने से तृप्त नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका ध्यान रखना है कि जो भलाई हमें करनी है उसे नहीं करने से भी हम दण्डाज्ञा के पात्र बनेंगे। संत योहन कहते हैं, ‘‘यदि कोई अपने भाई को, जिसे वह देखता है, नहीं प्यार करता, तो वह ईष्वर को जिसे उसने कभी नहीं देखा, प्यार नहीं कर सकता’’ (1 योहन 4ः 20)।
एलियस-सलीब-मूसा काल
कलीसिया की पूजन-विधि के अनुसार ईसा के महिमापूर्ण आगमन और क्रूस की विजय की याद करने का काल है एलियस-सलीब-मूसा काल। ईसा का रूपान्तरण इस काल का चैतन्य हमें समझाता है। रूपान्तरण के समय महिमा में प्रकट हुए ईसा के साथ दो नबी, मूसा और एलियस भी दिखाई दिये । मूसा विधान को और एलियस नबियों को सूचित करते हैं । ईसा ने पुराने विधान को प्रेम के नये विधान में बदलकर, भविश्यवाणियों की पूर्ति करते हुए महिमा में प्रवेष किया; उनके पुनरागमन का पूर्वास्वादन है पहाड़ी पर षिश्यों को प्राप्त वह दर्षन ।
संसार का अंत, मृत्यु, न्याय आदि सच्चाइयों पर मनन चिंतन करने और पष्चातापी हृदय से ईसा के दूसरे अगमन के लिए तैयार रहने में यह काल हमें मदद करता है।
क्रूस की विजय का पर्व
एलियस-मूसा-सलीब काल का मुख्य पर्व है क्रूस की विजय का पर्व। सितंबर 14 को माँ कलीसिया यह पर्व मनाती है। सम्राट काॅनस्टन्टाईन की माँ हेलेना रानी की खोज के फलस्वरूप ईसा मसीह का पवित्र क्रूस प्राप्त हुआ । उस घटना से संबन्धित है यह पर्व। कलीसिया के प्रारंभ से ही यह विष्वास प्रचलित है कि ईसा के दूसरे आगमन पर आकाष में प्रकट होने वाले मानव पुत्र का चिन्ह् उनका विजयी क्रूस होगा ।
प्रकाषना ग्रन्थ
नये विधान का सबसे आखिरी ग्रन्थ है प्रकाषना ग्रन्थ । प्रेरित संत योहन ने पात्मोस द्वीप में प्रकाषना ग्रन्थ की रचना की। प्रकाषना ग्रन्थ हमें सिखाता है कि संसार के अंत में जब मसीह प्रकट होंगे तब कुकर्मियों का विनाष किया जायेगा और धर्मी लोग जो प्रभु के अनुयायी हैं वे विजयी होकर उनके साथ स्वर्ग में प्रवेष करेंगे।
कलीसिया की प्रतिश्ठा का काल
हमारी पूजन-विधि का आाखिरी काल है कलीसिया की प्रतिश्ठा का काल। इस में चार सप्ताह होते हैं। इस काल के प्रारंभ में ही हम यह स्मरण करते हैं कि अंतिम न्याय के बाद मसीह अपनी वधू कलीसिया को, पिता ईष्वर को सौंपेंगे हैं (एफेसियों 5: 27, 1 कुरिन्थि 15: 24)। युगान्त में कलीसिया अपनी संतानों के साथ स्वर्गीय येरुसालेम की वधू-कक्ष में अपने दुलहे से मिलती है । आने वाले अनंत सौभाग्य का पूर्व आस्वादन है यह।
पिता के दाहिने महिमा में विराजमान प्रभु ईसा मसीह को सूचित करने हेतु, यज्ञ-मंडप में (जो स्वर्ग का प्रतीक है), बलिवेदी पर (जो ईष्वर का सिंहसान है) पवित्र ग्रंथ रखते हैं। पवित्र बलिदान में याजक बलिवेदी के मध्य, दायें और बायें चूमते हैं; इसका अर्थ यह है कि वे पवित्र त्रित्व की आराधना करते हैं।
ईसा मसीह के जन्म से आरंभ लेकर कलीसिया के जरिए स्वर्ग में पहुँचने के लिये बुलाए गये हैं हम मसीही लोग; उपासना का वर्श हमें उसी बात की याद दिलाता है।
स्वर्ग को लक्ष्य बना कर आगे बढ़ रही तीर्थ यात्री कलीसिया सुसन्देष काल से आरंभ लेकर कलीसिया की प्रतिश्ठा के काल तक के पूजन-विधि-वर्श में, मसीही रहस्यों में भाग लेकर और उनका अनुभव करके अपने जीवन का लक्ष्य पाती है। हमारे पवित्र बलिदान की विधि भी हमें इस मुक्ति योजना का अनुभव दिलाती है। पवित्र बलिदान से षक्ति पाकर प्रेम से सेवा षुश्रूशा का और भाइचारे का जीवन बिताकर स्वर्ग सौभाग्य प्राप्त करने के लिए पूजन-विधि-वर्श हमारी मदद करता है।
हम प्रार्थना करें
हे मसीह, आप हमारा पुनरुत्थान और आषा हैं; आप जब सलीब के साथ आकाष
के बादलों पर आयेंगे, तब आपके दाहिने विराजमान होने की कृपा हमें प्रदान कीजिए।
हम गायें
गीत
ईष्वर श्रेश्ठ महान, वे यह कहते जायें
भक्त सभी मिल जायें, जग में आश्रय पायें
कलीसा बन जायें, प्रभु ने दी ऐसी कृपा।
स्वर्ग पिता के दायें, आसीन है प्रभुवर (दायें)
कलीसिया में ज्योति, प्रभु ने दी नव-ज्योति
सूली के द्वारा, प्रभुवर है कितना महान।
दिव्य प्रतिश्ठा दिन में, दूत सभी गाते (सुर)
इस सौभाग्य की खातिर, कलीसिया की खातिर
प्रभुवर का गुणगान, प्रभुवर है कितना महान।।
कविता
आराधना में स्वर्ग महान, आराध्य तू हो प्रभु हमारा
मानव रक्षा करने को, मन्दिर को दिया सकलेष ने
क्रूस के चिह्न को लेगे वे, मसीहा प्रभुवर आयेगा
उसके साथ स्वर्ग में ही, पहुँचने योग्यता हम पायें।।
ईष-वचन पढ़ें और वर्णन करें
संत मत्ती 25: 31 - 46
मार्गदर्शन के लिये एक पवित्र वचन
‘‘तुमने मेरे इन भाइयों में से किसी एक के लिए, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न हो,
जो कुछ किया, वह तुमने मेरे लिए ही किया’’ (मत्ती 25: 40) ।
हम करें
अंतिम न्याय के विवरण में ईसा के दायें और बायें जो खड़े हैं, उनके द्वारा किये गये
कार्यों को नीचे दी गयी सारणी में लिखिए:
विवरण
मैं भूखा था तुमने मुझे भोजन
दायें
दया
बायें
नहीं दिया
मेरा निर्णय
दूसरों की मदद करने के जो भी अवसर मिलते हैं
उन्हें मैं नहीं खोने दूँगा/गी ।