पाठ 10
मृत्यु पर विजयी ईसा
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क्रूस पर मरे ईसा को अरिमथिया के यूसुफ, माता मरियम और कुछ स्त्रियों ने मिलकर कब्र में दफनाया। यहूदियों के दफन की प्रथा के अनुसार उन्होंने ईसा का षरीर सुगन्धित द्रव्यों के साथ कफन में लपेटकर दफनाया। ईसा ने कहा था कि वे तीसरे दिन जी उठेंगे; इसलिए यहूदियों के नेताओं ने पिलातुस की अनुमति लेकर कब्र पर मुहर लगाई और पहरा बैठाया।
सप्ताह के प्रथम दिन, रविवार को पौ फटते ही मरियम मगदलेना और कुछ अन्य स्त्र्रियाँ ईसा के षरीर का विलेपन करने के लिए सुगन्धित द्रव्य लेकर कब्र के पास गयीं। जाते समय वे आपस में यह कह रही थीं कि कौन हमारे लिए कब्र का पत्थर हटायेगा। लेकिन जब वे कब्र के पास पहुँचीं तब एक भारी भूकंप हुआ। ईष्वर का दूत स्वर्ग से उतरा, कब्र के पास आया और पत्थर अलग लुढका कर उस पर बैठ गया। उसका मुखमण्डल बिजली की तरह चमक रहा था; उसके वस्त्र हिम के समान उज्ज्वल थे। उसको देेखकर पहरेदार थर-थर काँपने लगे और मृतक जैसे हो गये। स्वर्गदूत ने स्त्रियों से कहा, ‘‘डरिये नहीं। मैं जानता हँू कि आप लोग ईसा को ढूँंढ रही हैं, जो क्रूस पर चढाये गये थे। वे यहाँ नहीं हैं। वे जी उठे हैं, जैसा कि उन्होंने कहा था। आइए और वह जगह देख लीजिए जहाँ वे रखे गये थे’’ मत्ति (28: 5, 6)। वे षीघ्र ही कब्र के पास से चली गयीं और विस्मय तथा आनन्द के साथ उनके षिश्यों को यह समाचार सुनाने दौड़ीं (मत्ति 28: 8)।
खाली कब्र
स्त्रियों से यह खबर सुनकर ‘‘पेत्रुस और योहन ईसा की कब्र की ओर दौडे़। योहन कब्र पर पहले पहुँचा। उसने झुककर यह देखा कि छालटी की पट्टियाँ पडी हुई हैं; किन्तु वह भीतर नहीं गया। सिमोन पेत्रुस उसके पीछे-पीछे च लकर आया और कब्र के अन्दर गया। उसने देखा कि पट्टियाँ पडी हुई हैं और ईसा के सिर पर जो अंगोछा बँधा था, वह पट्टियों के साथ नहीं, बल्कि दूसरी जगह तह किया हुआ अलग पडा है। तब वह दूसरा षिश्य भी, भीतर गया। उसने देखा और विष्वास किया’’ (योहन 20: 3 - 8)। षून्य कब्र ईसा के पुनरुत्थान के लिए एक सबूत हो गया।
ईसा ईष्वर के पुत्र हैं जो मृत्यु को पराजित कर महिमा के साथ पुनर्जीवित हुए। उन्होंने अपने पुनरुत्थान द्वारा ऐसा महत्व प्रकट किया जिसके जैसा दुनिया के आंरभ से आज तक और कोई भी व्यक्ति दावा नहीं कर सकता।
भविश्यवाणियाँ
ईसा ने अपने पुनरुत्थान की भविश्यवाणियाँ पहले ही की थीं । अपनी मृत्यु के बारे में ईसा की तीनों भविश्यवाणियाँ उनके पुनरुत्थान की बात प्रकट करते हुए ही समाप्त होती हैं। ‘‘मानव पुत्र को बहुत दुःख उठाना होगा; नेताओं, महायाजकों और षास्त्रियों द्वारा ठुकराया जाना, मार डाला जाना और तीसरे दिन जी उठना होगा’’ (लूकस 9: 22; मारकुस 8: 31; 9: 31; 10: 33 - 34)। ईसा अपने उपदेषें के बीच अक्सर अपने पुनरुत्थान के बारे में कहा करते थे।
मंदिर का पुनःनिर्माण
एक बार ईसा यरुसालेम मंदिर गये। वहाँ कबूतर, भेडें, बैल आदि बेचने वालों और सराफों को देखकर ईसा क्रु़द्ध हो गये। उन्हें दुःख हुआ कि अपने पिता का घर बाजार बनाया गया। उन्होंने रस्सियों का कोडा बनाकर सबको बाहर निकाल दिया। तब यहूदियों ने उनसे पूछाः ‘‘आप हमें कौनसा चमत्कार दिखा सकते हैं, जिससे हम यह जानें कि आपको ऐसा करने का अधिकार है ?’’ ईसा ने उत्तर दिया, ‘‘इस मंदिर को ढा दो और मैं इसे तीन दिनों के अन्दर फिर खडा कर दूँगा’’ (योहन 2: 18 - 19)। ईसा ने अपने षरीर के मन्दिर के बारे में यह कहा था।
योना का चिह्न
एक दिन कुछ षास्त्रियों और फरीसियों ने ईसा के पास जाकर उनसे एक चिह्न माँगा। ईसा ने उनको नबी योना का चिह्न दिया। योना पुराने विधान के नबियों में से एक थे; ईष्वर ने उन्हें यह दौत्य दिया था कि वे निनिवे जाकर लोगों के मनपरिवर्तन के लिए प्रवचन दें। लेकिन योना को यह अच्छा नहीं लगा और वे तरषीष के लिए जहाज में रवाना हुए । समुद्र क्षुब्ध हुआ, जोरें से आँधी चली और लहरें उठीं। जब मल्लाहों को मालूम पडा कि यह सब योना के कारण हो रहा है, तो उन्होंने योना को उठाकर समुद्र में फेंक दिया। तुरंत एक मच्छ योना को निगल गया। योना तीन दिन और तीन रात मच्छ के पेट में रहा। प्रभु के आदेषानुसार मच्छ ने योना को तट पर उगल दिया (योना 1: 1 - 2 : 11)।
योना तीन दिन और तीन रात मच्छ के अन्दर रहा; उसी प्रकार मानवपुत्र भी तीन दिन और तीन रात धरती के अन्दर रहेगा - यही था चिह्न जिसे ईसा ने उन्हें दिया। यह उन तीन दिनों को सूचित करता है जब ईसा मरने और दफनाये जाने के बाद कब्र में रहे।
दर्षन
पुनरुत्थान के बाद ईसा ने कई बार दर्षन दिये थे। उनके पुनरुत्थान की खबर स्वर्गदूत से सुनकर स्त्रियाँ षिश्यों को यह बताने दौड़ीं। तब ईसा ने उनके सामने आकर उनका अभिवादन किया। ईसा ने उनसे कहाः ‘‘डरो नहीं; जाओ और मेरे भाइयों को यह सन्देष दो कि वे गलीलिया जायें। वहाँ वे मेरे दर्षन करेंगे’’ (मत्ति 28: 8 - 10)।
ईसा की खाली कब्र देखकर मरियम मगदलेना रो रही थी, क्योंकि उसे नहीं मालूम था कि ईसा जी उठे हैं। ईसा ने उसे दर्षन देकर पूछा, ‘‘तुम क्यों रो रही हो’’ ?ईसा उसके सामने आये; उन्होंने उससे सवाल किया; फिर भी वह सोच रही थी कि वह माली है। तब ईसा ने उसे बुलाया, ‘‘मरियम’’ और वह समझ गयी कि वे ईसा हैं। वह ईसा से इब्रानी भाशा में बोली, ‘‘रब्बोनी’’; इस षब्द का अर्थ है ‘‘गुरुवर’’।
जब प्रेरित गण यहूदियों के भय से बंद कमरे में रहे; ईसा ने दो बार उनको दर्षन दिये और षांति का अभिवादन किया। बाद में तिबेरियस समुद्र के तट पर ईसा ने षिश्यों को दर्षन दिये। अपने दुःखभोग के बाद चालीस दिन तक ईसा ने उनको दर्षन देकर ईष्वर के राज्य के बारे में उन्हें सिखाया। इस तरह ईसा ने उन्हें बार-बार दर्षन देकर, अनेक प्रकार के प्रमाण देकर अपने पुनरुत्थान को साबित किया।
पुनरुत्थान काल
उपासना विधि-वर्श का पाँचवाँ काल है पुनरुत्थान काल। यह काल पुनरुत्थान के पर्व (जो सबसे बडा त्योहार है) से लेकर पेन्तेकोस्त के पर्व तक है । इस काल में हम ईसा मसीह की स्तुुति करते हैं, जिन्होंने अपने महिमामय पुनरुत्थान द्वारा मृत्यु को पराजित कर ईष्वर की महिमा प्रकट की है।
इस काल में हमारे मननचितंन के विशय हैं: ईसा का पुनरुत्थान, पाप और मृत्यु पर उनकी विजय, ईसा के पुनरुत्थान द्वारा हमें प्राप्त नवजीवन और ईसा का पुनरुत्थान जो हमारे पुनरुत्थान का आधार है।
पुनरुत्थान का पर्व
पुनरुत्थान का पर्व वह है जिसमें मृत्यु पर विजयी होकर ईसा के जी उठने की हम याद करते हैं। यह उपासना विधि-वर्श के सबसे महत्वपूर्ण पर्व है; इसलिए यह पर्वों का पर्व के नाम से जाना जाता है।
नया रविवार
पुनरुत्थान के पर्व के बाद के रविवार को नया रविवार कहते हैं। जो लोेग पुनरुत्थान के समारोह के साथ-साथ
बप्तिस्मा ग्रहण करते हैं, उनके लिए पवित्र बलिदान में पूर्ण रूप से भाग लेने का प्रथम रविवार भी है यह। ख्रीस्तीय जीवन के नये अनुभव की षुरुआत का दिन होने से इसे नया रविवार कहते हैं।
ईसा ने अपने पुनरुत्थान के बाद प्रेरित संत थाॅंमस को दर्षन दिये थे; उसकी भी याद करने का दिन है यह। इसलिए ‘‘संत थाॅंमस रविवार’’ भी इसे कहा जाता है। इस दिन संत थाॅंमस के पुण्यस्थलों की तीर्थयात्रा करने का रिवाज प्रचलित है। मलयाट्टूर की तीर्थयात्रा इनमें सबसे अधिक प्रसिद्ध है।
ईसा ने अपने पुनरुत्थान द्वारा पाप और मृत्यु पर विजयी पायी; उनके साथ, हम पाप के लिये मृत होकर, पुनरुत्थान का (नया) जीवन बिताने की कोषिष करें।
हम प्रार्थना करें
हे प्रभु मसीह, आप मार्ग, सत्य और जीवन हैं;
हम आपके पुनरुत्थान में आनंद मनाते हैं; आप हमें
अंधकार से प्रकाष की ओर, असत्य से सत्य की ओर
और मृत्यु से अमरता की ओर ले जाइए।
हम गायें
गीत
कब्र थी मुद्रित और उसी पर पहरा लगाया था
फिर भी प्रभुजी जीवित हो कर उसमें से निकला।
महिमामय इस पुनरुत्थान से हर्शित होता हूँ
भक्यादर से जीवित प्रभु का वन्दन करता हूँ।।
कविता
कब्रस्थान से येषु मसीह, तीसरे दिन में उत्थित है
महिमा उज्ज्वल पुनरूत्थान, ध्यान कर देना हम सभी में
येषु मसीहा उत्थान को, हम लोगों का आश्रय है
पुनरूथिन हो हम इक दिन, उसमें हमारे जीवन है।
ईष-वचन पढ़ें और वर्णन करें
योहन 20: 1 - 21
मार्गदर्षन के लिए एक पवित्र वचन
‘‘यदि मसीह नहीं जी उठे, तो हमारा धर्मप्रचार व्यर्थ है और
आप लोगों का विष्वास भी व्यर्थ है’’ । (1 कुरिन्थि 15: 14)
हम करें
सन्त लूकस के सुसमाचार के आधार पर प्रभु ईसा के
पुनरुत्थान की घटना का विवरण कीजिए। (लूकस 24: 1 - 12)
मेरा निर्णय
पुनरुत्थित ईसा मुझमें निवास करते हैं। मैं निरन्तर उनका
स्मरण करूँगा/गी और स्तुति करूँगा/गी।