पाठ 8
ईसा हमारे लिये मरे
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मानव मुक्ति के लिए बलि होने का समय निकट आया, यह समझकर ईसा अपनी आदत के अनुसार जैतून पहाड गये। उनके षिश्य भी उनके साथ हो लिये। ईसा ने वहाँ पहुँंच कर उनसे कहा, ‘‘प्रर्थना करो, जिससे तुम परीक्षा में न पड़ो।’’ तब वे पत्थर फेंकने की दूरी तक उनसे अलग हो गये और घुटने टेक कर उन्होंने यह कहते हुए प्रार्थना की, ‘‘पिता, यदि तू ऐसा चाहे, तो यह प्याला मुझसे हटा ले। फिर भी मेरी नहीं, बल्कि तेरी ही इच्छा पूरी हो’’। तब उन्हें स्वर्ग का एक दूत दिखाई पड़ा, जिसने उनको ढारस बँंधाया। वे प्राणपीडा में पडने के कारण और भी एकाग्र होकर प्रार्थना करते रहे और उनका पसीना रक्त की बूँदों की तरह धरती पर टपकता रहा (लूकस 22: 39-44)। इतना मानसिक दुःख उन्होंने सहा। फिर भी पिता ईष्वर ने प्याला हटाना नहीं, परन्तु दुःख तकलीफ झेलने की षक्ति देना ही चाहा।
यूदस का विष्वासघात
इस समय, यूदस बारह षिश्यों में से एक, एक बड़े दल के साथ वहाँ पहुँचा। पहले से दिये गये संकेत के अनुसार यूदस ने आगे जाकर ईसा का चुम्बन किया। ईसा ने उससे कहा, ‘‘यूदस, क्या तुम चुम्बन देकर मानव पुत्र के साथ विष्वासघात कर रहे हो ?’’ (लूकस 22: 48)। जब यह मालूम पड़ा कि ईसा पकड़ा जायेगा, तब सभी षिश्य ईसा को छोड़कर भाग गये। सेवकों ने ईसा को गिरफ्तार कर लिया।
पेत्रुस का अस्वीकरण
उन्होंने ईसा को गिरफतार कर लिया और उन्हें ले जाकर प्रधानयाजक के यहाँ पहुचा दिया। पेत्रुस कुछ दूरी पर उनके पीछे-पीछे चला। ठंड के कारण लोग प्राँगण के बीच में आग जलाकर उसके चारों ओर बैठ रहे थे। पेत्रुस भी उनके साथ बैठ गया। एक नौकरानी ने आग के प्रकाष में पेत्रुस को बैठा हुआ देखा और उसपर दृश्टि गडा कर कहा, ‘‘यह भी उसी के साथ था’’। किन्तु पेत्रुस ने अस्वीकार करते हुए कहा, ‘‘नहीं भई, मैं उसे नहीं जानता’’। थोड़ी देर बाद किसी दूसरे ने पेत्रुस को देख कर कहा, ‘‘तुम भी उन्हीं लोगों में एक हो’’। पेत्रुस ने उत्तर दिया, ‘‘नहीं भई, मैं नहीं हूँं’’। करीब घण्टे भर बाद किसी दूसरे ने दृढ़तापूर्वक कहा, ‘‘निष्चय ही यह उसी के साथ था। यह भी तो गलीली है।’’ पेत्रुस ने कहा, ‘‘अरे भई, मैं नहीं समझता कि तुम क्या कह रहे हो’’। वह बोल ही रहा था कि उसी क्षण मुर्गे ने बाँग दी और प्रभु ने मुड़ कर पेत्रुस की ओर देखा। तब पेत्रुस को याद आया कि प्रभु ने उससे कहा था कि आज मुर्गे के बाँग देने से पहले ही तुम मुझे तीन बार अस्वीकार करोगे, और वह बाहर निकलकर फूट-फूट कर रोया। (लूकस 22: 54 - 62)
पिलातुस के सामने
पिलातुस के सामने खड़े किये ईसा के विरुद्ध उन्होंने तीन अभियोग लगाये, ‘‘हमें पता चला कि यह मनुश्य हमारी जनता में विद्रोह फैलाता है, कैसर को कर देने से लोगों को मना करता और अपने को मसीह, राजा कहता।’’ यह सुनकर पिलातुस ने ईसा से यह प्रष्न किया, ‘‘क्या तुम यहूदियों के राजा हो ?’’ (लूकस 23: 2-3)। ईसा ने उत्तर दिया, ‘‘मेरा राज्य इस संसार का नहीं है। यदि मेरा राज्य इस संसार का होता, तो मेरे अनुयायी लड़ते और मैं यहूदियों के हवाले नहीं किया जाता।’’ पिलातुस को यह मालूम था कि ईसा निर्दाेश है और उन्होंने इश्र्या के कारण ईसा को पकड़वाया । इसलिए पिलातुस ईसा को छुड़ाना चाहता था। पास्का पर्व के अवसर पर एक बन्दी को रिहा करने का रिवाज था; इसलिए पिलातुस ने उनसे कहा, ‘‘क्या मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को रिहा करूँ’’ ं?वे सब के सब एक साथ चिल्ला उठे, ‘‘इसे क्रूस दीजिए, हमारे लिए बराब्बस को रिहा कीजिए।’’ जब पिलातुस ने देखा कि अपनी कोषिष नहीं चलती, तो उसने पानी मँगा कर लोगों के सामने हाथ धोये और कहा, ‘‘मैं इस धर्मात्मा के रक्त का दोशी नहीं हँू।’’ फिर पिलातुस ने उनके लिए बराब्बस को मुक्त कर दिया और ईसा को कोड़े लगवा कर क्रूस पर चढ़ाने सैनिकों के हवाले कर दिया।
ईसा के अपमान और उपहास
सैनिक ईसा को महल के अन्दर ले गए; उन्होंने उनके कपड़े उतारकर उन्हें लाल चोगा पहनाया, काँटों का मुकुट गूँथ कर उनके सिर पर रखा। और उनके दाहिने हाथ में सरकण्डा थमा दिया। तब उनके सामने घुटने टेककर उन्होंने यह कहते हुए उनका उपहास किया, ‘‘यहूदियों के राजा, प्रणाम’’। वे उनपर थूकते और सरकण्डा छीनकर उनके सिर पर मारते थे।
गोलगोथा की ओर
ईसा क्रूस उठाकर गोलगोथा की ओर निकला। रास्ते में भी सैनिक ईसा को मारते थे। वे डरते थे कि ईसा षायद रास्ते में ही मर जायेंगे; इसलिए उन्होंने सिमोन नामक कुरेने-निवासी को क्रूस उठाने के लिए बाध्य किया। ईसा को देखकर रास्ते में ही कुछ नारियाँ रो रही थीं; ईसा ने उनसे कहा, ‘‘येरुसालेम की बेटिया,े मेरे लिए मत रोओ; अपने लिए और अपने बच्चों के लिए रोओ।’’ (लूकस 23: 28)।
ईसा कू्रस पर मर जाते हैं
गोलगोथा पहुँचने पर सिपाहियों ने ईसा को क्रूस पर लिटाकर उनके हाथों और पैरों पर कील ठोंके; फिर क्रूस खड़ा कर दिया। सिपाहियों ने उनके कपडों के चार भाग कर दिये - हर सैनिक के लिए एक-एक। उनका कुर्ता बिना सिलाई के, ऊपर से नीचे तक पूरा का पूरा बुना हुआ था। वे उसे फाड़ना नहीं चाहते थे। इसलिए उन्होंने चिट्ठी डालकर देखा कि वह किसको मिलेगा। कू्रस पर टंगे रहते समय भी सिपाहियों और जनता ने ईसा का उपहास किया; क्रूस पर से उतर आने के लिए ललकारा। लेकिन ईसा ने सब कुछ सह लिया।
अब लगभग दोपहर हो रहा था; तीसरे पहर तक सारे प्रदेष पर अंधेरा छाया रहा। तीसरे पहर ईसा ने ऊँचे स्वर से पुकार कर कहा, ‘‘पिता, मैं अपनी आत्मा को तेरे हाथों सौंपता हूँ (लूकस 23: 46)। यह कहकर उन्होंने प्राण त्याग दिये। तब सूर्य अंधकारमय हो गया, पष्थ्वी काँप उठी, चट्टानें फट गयीं। मंदिर का परदा ऊपर से नीचे तक फटकर दो टुकडे हो गये (मत्ती 27: 50 - 51)। षतपति, जो ये सब घटनाएँ देख रहा था, ईष्वर की स्तुति कर के बोल उठा, ‘‘निष्चय ही यह ईष्वर का पुत्र था’’।
ईसा हमारे लिए पीड़ाएँ सहकर क्रूस पर मरे। ईसा की मृत्यु ने हमें पाप मोचन और मुक्ति प्रदान की। आज जब भी हम पाप करते हैं तब ईसा को दुःख पहुँचाते हैं।
पवित्र बलिदान में जब पुरोहित रोटी की थाली और दाखरस का प्याला लेकर बलिवेदी के बीच में आते हैं, वह हमें ईसा की कलवारी यात्रा की याद दिलाता है। फिर वे दोनों हाथ सलीब के चिह्न में पकड़कर प्रार्थना करते हैं - यह ईसा की क्रूस पर की मृत्यु की याद दिलाता है। जब भी हम पवित्र बलिदान में भाग लेते हैं तब हमारे लिए मरे ईसा को धन्यवाद देते हुए प्रार्थना करें।
पुण्य षुक्रवार
पुण्य षुक्रवार या दुःखभोग का षुक्रवार वह दिन है जिसमें हम ईसा के दुुःखभोग एवं क्रूस पर की मृत्यु का स्मरण करते और मनाते हैं। तरह-तरह के अनुश्ठानों के साथ कलीसिया इस दिन को मनाती है। दुःखभोग का वाचन, क्रूस की वंदना, खट्टे रस का पान, क्रूस का रास्ता, प्रायष्चित की यात्रा आदि पुण्य षुक्रवार के अनुश्ठान के भाग हैं।
‘‘ईष्वर ने संसार को इतना प्यार किया कि उसने उसके लिए अपने एकलौते पुत्र को अर्पित कर दिया, जिससे जो उसमें विष्वास करता है, उसका सर्वनाष न हो, बल्कि अनन्त जीवन प्राप्त करें (योहन 3: 16)।
पिता ईष्वर ने अपने इकलौते को संसार में इसलिए भेजा था कि संसार उसके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे। हमारे पापों के प्रायष्चित के लिए स्वयं को क्रूस पर बलि चढ़ाकर ईसा ने हमें मुक्ति दिलाई। पाप-मार्गों से दूर रहकर हम इस मुक्ति का फल प्राप्त करें।
हम प्रार्थना करें
हे मसीह, आप हमारी मुक्ति के लिए बलि चढ़ाए गए। आपने अपने दुःखभोग, मृत्यु,
दफन, और पुनरुत्थान की स्मृति मनाने का हमें आदेष दिया है। हमें उन दिव्य
रहस्यों का फल प्राप्त करने योग्य बना दीजिए।
हम गायें
गीत
हे प्रभु नित्य पुरोहित तू, मानव खातिर बलित हुआ
तेरे न्याय का सिंहासन, मन में भीति जगाता है।
मानव कुल की दुर्बलता, जानने वाले हे प्रभुवर
आया हूँ मैं तेरी षरण, मुझ पापी पर करुणा कर।।
कविता
ईसा नित्य पुरोहित तू, तुझको देता पूजन हम
तू मानव आया देने को, क्रूस के बलिदान पूर हुआ
न्याय का आसन तू हे प्रभु, भीती पूण कर देत मन
दुर्बल मैं पापी करू दे, करूणा वर्शा पूरी कर।।
ईष-वचन पढ़ें और वर्णन करें
लूकस 22: 39 - 53
मार्गदर्षन के लिए एक पवित्र वचन
‘‘पिता, मेरी नहीं, बल्कि तेरी ही इच्छा पूरी हो ’’ (लूकस 22: 42)।
हम करें
चारों सुसमाचारों में दिए गए दुःखभोग के वर्णन पढ़कर उनमें से उन सात वाक्यों को लिखिए
जिन्हें ईसा क्रूस पर टंगे हुए बोले थे।
मेरा निर्णय
जो मेरे लिए मरे उन ईसा के विरुद्ध पाप न करते हुए (करती हुई )
जीने की कृपा के लिए मैं रोज उनसे विनती करुँगा/गी।