• भूखे पेट से वह सूअर चरा रहा था।  ‘जो फलियाँ सूअर खाते थे उन्हीं में से थोडा मिल जायें, तो....’ उसने चाहा। लेकिन वह भी कोई उसे नहीं देता था। उसे उन मीठे अनुभवों की याद आयी, जिन्हें उसने स्वयं खो दिया थाः एक धनी पिता के दो पुत्रों में छोटा पुत्र था... । अपने इच्छानुसार जीने के लिए पिता से अपना हिस्सा लेकर दूर देष चल पड़ा....सारी सम्पत्ति दोस्तों के साथ भोग-विलास में उडा दी.... आखिर भूखे मारे अब पहुँचा है सूअरों के बीच, जो  यहूदियों के लिए सबसे घृणित जानवर हैं... खोये हुए सौभाग्यपूर्ण जीवन  की यादें उसे पष्चाताप की ओर ले चलीं। उस स्थिति से बचकर पिता के पास वापस जाने के लिए उसने चाहा; उसने यह निर्णय लियाः मैं उठकर अपने पिता के पास जाऊँगा और उनसे कहूँगा, ‘‘पिताजी, मैंने स्वर्ग के विरुद्ध और आपके प्रति पाप किया है। मैं आपका पुत्र कहलाने योग्य नहीं रहा। मुझे अपने मजदूरों में से एक जैसा रख लीजिए’’। तब वह उठकर अपने पिता के घर की ओर चल पडा। उसका पिता अपने पुत्र के लौटने की बाट जोह रहा था। वह दूर ही था कि पिता ने उसे देख लिया और दया से द्रवित हो उठा। उसने दौडकर उसे गले लगा लिया और उसका चुम्बन किया। उसने नौकरों से कहा, ‘जल्दी अच्छे से अच्छे कपडे ला कर इसको पहनाओ और इसकी उँगली में अँगूठी और इसके पैरों में जूते पहना दो।’ इस प्रकार उसने जो पुत्र-स्थान नश्ट किया था, वह पिता ने उसे वापस दिया (लूकस 15: 11-24)।

                    प्रभु ईसा ने यह समझाने के लिए यह दृश्टान्त सुनाया कि पष्चातापी पापी के प्रति ईष्वर असीम दया दिखाता है। ‘खोया हुआ लडका’ नामक इस दृश्टान्त द्वारा ईसा पिता ईष्वर का अनंत प्रेम प्रकट करते हैं, जो पापियों के लौट आने की क्षमापूर्वक राह देखता है और पष्चाताप करने वालों पर दया करता है।

     

    भटकी हुई भेड़ का दश्टान्त

     

                    एक बार ईसा ने उनको यह दृश्टान्त सुनाया। ‘‘यदि तुम्हारे एक सौ भेडं़े हांे और उनमें से एक भी भटक जाये, तो तुम लोगों में कौन ऐसा होगा, जो निन्यानबे भेडों को निर्जन प्रदेष में छोडकर न जाये और उस भटकी इुई को तब तक न खोजता रहे, जब तक वह उसे नही पाये ?पाने पर वह आनन्दित होकर उसे अपने कन्धों पर रख लेता है और घर आकर अपने मित्रों और पडोसियों को बुलाता है और उनसे कहता है, ‘मेरे साथ आनन्द मनाओ, क्योंकि मैंने अपनी भटकी इुई भेड को पा लिया है’। मैं तुम से कहता हूँ इसी प्रकार निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा, जिन्हें पष्चाताप की आवष्यकता नहीं है, एक पष्चातापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक आनन्द मनाया जायेगा’’ (लूकस 15: 3 - 7)। ईसा ने यह दृश्टात उन फरीसियों और षास्त्रियों से कहा जो ईसा की आलोचना करते थे  कि वे नाकेदारों और पापियों के साथ खाते पीते हंै। इसके द्वारा ईसा ने यह प्रकट किया कि एक पष्चातापी पापी के प्रति स्वर्ग में अधिक आनन्द मनाया जायेगा। (लूकस 15: 3)

     

    खोये हुये सिक्के का दष्श्टान्त

     

                    खोये हुये सिक्के के दृश्टान्त द्वारा ईसा एक स्त्री के आनन्द की गहराई प्रकट करते हैंः उसके पास अपनी कमाई के दस सिक्के थे। यदि उनमें से एक खो जाये तो वह नहीं सोच सकती कि ‘जाने दो’। परन्तु उसे पाने तक वह सावधानी से ढ़ूँढेगी। पाने पर वह अपनी सखियों और पडोसिनों को बुलाकर आनन्द मनाती है। इसी प्रकार एक पष्चातापी पापी के प्रति स्वर्ग में आनन्द मनाया जाता है (लूकस 15: 8 - 10)।

     

    पापिनी स्त्री को मुक्ति

     

                    एक फरीसी, सिमोन, ने ईसा को अपने यहाँ भोजन करने का निमन्त्रण दिया। वह उस फरीसी के घर आकर भोजन करने बैठे। नगर की एक पापिनी स्त्री को यह पता चला कि ईसा फरीसी के यहाँ भोजन कर रहे हैं। वह संगमरमर के पात्र में इत्र लेकर आयी और रोती हुई ईसा के चरणों के पास खडी हो गयी। उसके आँसू उनके चरण भिगोने लगे, इसलिए उसने उन्हें अपने केषों से पोंछ लिया और उनके चरणों को चूम-चूम कर उनपर इत्र लगाया। जिस फरीसी ने ईसा को निमन्त्रण दिया था, उसने यह देखकर मन-ही-मन कहा, ‘‘यदि यह आदमी नबी होता, तो जरूर जान जाता कि जो स्त्री इसे छू रही है वह कौन और कैसी है - वह तो पापिनी है’’ ।

                    इस पर ईसा ने उससे कहा, ‘‘सिमोन मुझे तुमसे कुछ कहना है’’। उसने उत्तर दिया, ‘‘गुरुवर, कहिए’’। ईसा बोले, ‘‘किसी महाजन के दो कर्जदार थे। एक पाँच सौ दीनार का ऋणी था और दूसरा पचास का । उनके पास कर्ज अदा करने के लिए कुछ नहीं था, इसलिए महाजन ने दोनों को माफ कर दिया। उन दोनों में से कौन उसे अधिक प्यार करेगा’’?सिमोन ने उत्तर दिया, ‘‘मेरी समझ में तो वही जिसका अधिक ऋण माफ हुआ’’। ईसा ने उससे कहा, ‘‘तुम्हारा निर्णय सही है’’। तब उन्होंने उस स्त्री की ओर मुड़ कर सिमोन से कहा, ‘‘इस स्त्री को देखते हो ?मैं तुम्हारे घर आया, तुमने मुझे पैर धोने कि लिए पानी नहीं दिया; पर इसने मेरे पैर अपने आँसुओं से धोये और अपने केषों से पांेछे। तुमने मेरा चुम्बन नहीं किया, परन्तु यह जब से भीतर आयी है, मेरे पैर चूमती रही है। तुमने मेरे सिर में तेल नहीं लगाया, पर इसने मेरे पैरों पर इत्र लगाया है। इसलिए मैं तुमसे कहता हँू, इसके बहुत से पाप क्षमा हो गये हंै, क्योंकि इसने बहुत प्यार दिखाया है। पर जिसे कम क्षमा किया गया, वह कम प्यार दिखाता है’’। तब ईसा ने उस स्त्री से कहा, ‘‘तुम्हारे पाप क्षमा हो गये हैं’’ (लूकस 7: 36 - 49)। पष्चातापी पापियों के प्रति ईष्वर कितना दयालु है - ये पवित्र वचन यह स्पश्ट करते हैं।

     

    व्यभिचार में पकड़ी गयी स्त्री

                    एक बार ईसा मन्दिर में लोगों को षिक्षा दे रहे थे। उस समय षास्त्री और फरीसी व्यभिचार में पकड़ी गयी एक स्त्री को ले आये। उन्होंने ईसा से कहा, ‘‘गुरुवर, यह स्त्री व्यभिचार करते हुए पकड़ी गयी है। संहिता में मूसा ने हमें ऐसी स्त्रियों को पत्थरों से मार डालने का आदेष दिया है। आप इसके विशय में क्या कहते है?’’ उन्होंने ईसा की परीक्षा लेते हुए यह कहा, जिससे उन्हें उनपर दोश लगाने का कोई आधार मिले। ईसा झुक कर उँगली से भूमि पर लिखते रहे।

                    जब वे उनसे उत्तर देने के लिए आग्रह करते रहे, तो ईसा ने सिर उठा कर उनसे कहा, ‘‘तुम में से जो निश्पाप हो, वही सबसे पहले इसे पत्थर मारे’’। यह सुनकर बडों से लेकर छोटों तक, सब के सब, एक-एक कर खिसक गये। ईसा अकेले रह गये और वह स्त्री बीच में खडी रही। तब ईसा ने सिर उठा कर उससे कहा, ‘‘नारी, क्या एक ने भी तुम्हें दण्ड़ नहीं दिया?’’ उसने उत्तर दिया, ‘‘महोदय, एक ने भी नहीं’’। इसपर ईसा ने उससे कहा, ‘‘मैं भी तुम्हें दण्ड़ नहीं दूँगा। जाओ और अब से फिर पाप नहीं करना’’। मूसा के नियम के अनुसार उस पापिनी को पत्थरों से मारा जाना था; लेकिन ईसा ने उसे उस मृत्यु और पाप के राहों से बचाया। (योहन 8: 1 - 11)

                    ईसा जो पापियों को खोजते आते हैं और पाप मोचन देकर अनुग्रह प्रदान करते, उनसे एक ओर बात चाहते हंै, ‘‘फिर पाप नहीं करना’’। कभी भी पाप नहीं करने का हम ध्यान रखें। यदि कभी पाप में गिर जायें, तो जल्दी से जल्दी पष्चाताप करते हुए ईसा की ओर मुड़ें; उस षान्ति और चैन का अनुभव करें जो दयालु ईष्वर प्रदान करता है।

     

     

    हम प्रार्थना करें

     

    हे मसीह, आप पापियों को खोजने आये; खोये हुए लड़के के समान,

    हम भी अपनी गलतियाँ स्वीकार  कर पष्चाताप करते हैं।

    हमें सहायता दीजिए कि हम रोज आपकी आज्ञाओं का मनन चिंतन करें

    और उनके मार्ग पर चलकर अनंत सौभाग्य में पहँुच जायें।

     

    हम गायें

     

    गीत

     

                    पष्चातापी पापी पर, प्रभुजी तेरा प्रेम अपार

                    तेरी करुणा पाने को, आता हूँ मैं तेरे द्वार।

                    पाप के पथ से हट चलने दे जीवन पथ बारम्बार

                    प्रभुजी अपने हाथों से, खोल मुझे तू जीवन द्वार।।

     

    कविता

     

    मेंढ़पाल जिसका दूर हुए, मेढ़ को उठाते आये

    प्रभुवर तेरी करूणा को, नत मस्तक हो आराधना

    अनुतापी को आदर से, आश्रय देता देव कुमार

    पाप के रास्ते छोड़ने को, प्रभुवर करूणा बरसा दे।।

     

    ईशवचन पढ़े और वर्णन करें

    लूकस 15: 1 - 31

     

    मार्ग-दर्षन के लिए एक पवित्र वचन

     

    ‘‘निन्यानबे धर्मियों की अपेक्षा, जिन्हें पष्चाताप की आवष्यकता नहीं है,

    एक पष्चातापी पापी के लिए स्वर्ग में अधिक

    आनन्द मनाया जायेगा।’’ (लूकस 15: 7)

     

    हम करें

     

    खोये हुए लड़के का दृश्टान्त पढ़कर एक एकांकी

    के रूप में अभिनय कीजिए।

     

    मेरा निर्णय

     

    यदि मैं पाप में गिर जाऊँ तो जल्दी से जल्दी

    पाप स्वीकार करुँगा/गी।