• योहन बपतिस्ता यर्दन नदी के तट पर पष्चाताप का बपतिस्मा दे रहेे थे। अनेक लोगों ने आकर योहन से बपतिस्मा स्वीकार किया। पाप रहित होने पर भी ईष्वर के पुत्र, प्रभु ईसा उनके बीच आ खड़े हुए। तब योहन ने यह पूछ कर उन्हें रोकाः ‘‘मुझे तो आपसे बपतिस्मा लेने की जरूरत है और आप मेरे पास आते हंै ? परन्तु ईसा ने उत्तर दिया, ‘‘अभी ऐसा ही होने दीजिए। यह हमारे लिए उचित है कि हम इस तरह धर्मविधि पूरी करें।’’ इस पर योहन ने ईसा की बात मान ली। बपतिस्मा के बाद ईसा तुरन्त जल से बाहर निकले। उस समय स्वर्ग खुल गया। उन्होंने ईष्वर के आत्मा को कपोत के रूप में उतरते और अपने ऊपर ठहरते देखा और स्वर्ग से यह वाणी सुनाई दी, ‘‘यह मेरा प्रिय पुत्र है। मैं इस पर अत्यन्त प्रसन्न हूँ।’’ (मत्ती 3: 13-17)

     

    योहन का साक्ष्य

     

                    दूसरे दिन, योहन ने ईसा को अपनी ओर आते देखा और कहा, ‘‘देखो, ईष्वर का मेमना जो संसार का पाप हरता है। यह वही हैं, जिनके विशय में मैंने कहा, मेरे बाद एक पुरुश आने वाले हैं। वह मुझसे बढकर हैं, क्योंकि वह मुझसे पहले विद्यमान थे। मैं भी उन्हें नहीं जानता था, परन्तु मैं इसलिए बपतिस्मा देने आया हूँ कि वह इस्राएल पर प्रकट हो जायंे।’’ फिर योहन ने यह साक्ष्य दिया, ‘‘मैंने आत्मा को कपोत के रूप में स्वर्ग से उतरते और उन पर ठहरते देखा। मैं भी उन्हें नहीं जानता था; परन्तु जिसने मुझे                जल से बपतिस्मा देने भेजा, उसने मुझ से कहा था, ‘तुम जिनपर आत्मा को उतरते और ठहरते देखोगे,     वही पवित्रात्मा से बपतिस्मा देते हैं।’ मैंने देखा और साक्ष्य दिया कि वह ईष्वर के पुत्र हैं।’’ (योहन 1: 29 - 34)

                    संसार का पाप हरने आये ईष्वर के मेमना ईसा हमारे पापों के प्रायष्चित के लिए अनुताप का बपतिस्मा स्वीकार करने यर्दन नदी में उतरे। मानव-पापों के प्रायष्चित के लिए वे जो बलि कलवारी पर चढ़ाने वाले थे और उनका महिमामय  पुनरुत्थान आदि प्रभु ईसा का बपतिस्मा दर्षाता है।


     

    पवित्र त्रित्व

     

                    ईसा के बपतिस्मा के अवसर पर पवित्र त्रित्व का रहस्य प्रकट हुआ। पुत्र ईष्वर बपतिस्मा लेने के लिए विनम्र होकर खड़ा था; पिता ईष्वर ने पुत्र पर प्रसन्न होकर ऊँचे स्वर में साक्ष्य दिया कि यह मेरा प्रिय पुत्र है। पवित्रात्मा ईष्वर, कपोत के रूप में उतर कर उन पर ठहरा। इस प्रकार जो रहस्य मानव बुद्धि के लिए अग्राह्य था, उसे हमें प्रकट करने के लिए ईष्वर ने चाहा।

                    ईसा पवित्रात्मा से अभिशिक्त हुए। इस प्रकार उनके नाम ‘‘मसीह’’ का अर्थ भी हमें मिल गया; (सिरियायी भाशा में) ‘म्षीहा’ षब्द का अर्थ है - ‘अभिशिक्त’।

                    पवित्र त्रित्व का रहस्य हमारे विष्वास और जीवन का केन्द्र है । हमारी सृश्टि, मुक्ति और पवित्रीकरण पवित्र त्रित्व ही करता है। पिता, पुत्र और पवित्रात्मा के नाम पर बपतिस्मा स्वीकार करके हम ईसा की मृत्यु और पुनरुत्थान में भाग लेते हंै। ईसा के साथ पापों के लिए मृत होकर और आत्मा से पवित्रीकृत होकर, पवित्र त्रित्व से मिलकर जीवन बिताने के लिए हम बुलाये गये हैं।

                    ‘‘हमारे प्रभु ईसा मसीह की कृपा, पिता ईष्वर का प्रेम तथा पवित्रात्मा का संसर्ग हम सब को प्राप्त हो,’’ संत पौलुस के इस अभिवादन में भी यही सत्य प्रकट होता है।  (2 कुरिन्थी 13: 13)

                    हमारे पवित्र बलिदान में याजक इन्हीं षब्दों में दो बार आषीर्वाद देते हैं। जब हम पवित्र बलिदान में पुनरुत्थान गीत (हे सबके प्रभु...) गाते हैं तब ईसा के पुनरुत्थान के साथ-साथ उनके बपतिस्मा के समय स्वर्ग खुलने का वह रहस्य भी स्मरण करते हैं। ईसा में पूर्ण हुए ईष्वरीय प्रकटीकरण का खास अनुश्ठान ही यहाँ होता है।

    प्रकटीकरण (देनहा) का पर्व

     

                    ईसा के बपतिस्मा की याद दिलाता है प्रकटीकरण का पर्व। जनवरी छः तारीख को हम इसे मनाते हैं । इस त्यौहार से जुड़ी हुई कुछ कर्मविधियाँ सीरो मलबार की कलीसिया में प्रचलित थीं। इनके अनुसार यह राकुलि त्यौहार और पिंटिकुत्ति त्यौहार भी कहलाता है।

     

    प्रकटीकरण काल

     

                    ईसा के बपतिस्मा की याद दिलानेवाले प्रकटीकरण पर्व से उपासना विधि के वर्श का तीसरा काल, यानी प्रकटीकरण काल, षुरू होता है। बपतिस्मा से षुरू होने वाला ईसा का सार्वजनिक जीवन है इस काल की मनन-प्रार्थना का विशय । सिरियायी षब्द ‘देनहा’ का अर्थ है ‘सूर्योदय’, प्रकटीकरण, आदि। ईसा स्वर्ग से उदित हुआ सूरज है; वह यर्दन के बपतिस्मा द्वारा उदित होकर संसार का प्रकाष बन गया।

                    प्रकटीकरण काल में हम पवित्र त्रित्व, ईसा के ईष-पुत्रत्व, उनके मानव-ईष्वरीय स्वभाव, स्वयं षून्य बनना, सार्वजनिक जीवन... आदि मुक्तिदायक रहस्यों का स्मरण करते और मनाते हैं।

                    प्रकटीकरण काल के षुक्रवारों में कलिसिया संतों के पर्व मनाती है। ईसा मसीह ज्योति है और संत लोग अपने आदर्ष जीवन द्वारा ईसा के साक्षी रहे; इस प्रकार उन्होंने मसीह के प्रकाष की ओर तथा त्रित्व की एकता की ओर मानव जाति की अगुवाई की। प्रकटीकरण काल के आखिरी षुक्रवार को हम सब मृत-विष्वासियों की याद करते हैं।

     

    ईसा संसार की ज्याेित

     

                    ईसा संसार की ज्योति है। संत योहन ईसा को वह ज्योति बताते हैं जिसे अंधकार नहीं बुझा सकता (योहन 1: 5-9) ‘अन्धकार में रहनेवाले लोगों ने एक महती ज्योति देखी’; याह संत मत्ति के अनुसार इसायस नबी की यह भविश्यवाणी ईसा में पूरी हुई। (मत्ती 4: 16)

                   

                    ईसा संसार की ज्योति है; उनका स्मरण करते हुए प्रकटीकरण पर्व में केले के धड़ को दियों

    से सजाकर और ‘एलप्पय्या’ (ईष्वर प्रकाष है) गाकर उसकी परिक्रमा करने का रिवाज

    सीरो मलबार कलिसिया में प्रचलित था। इस कारण यह पर्व ‘पिन्टिकुित्त पर्व’ के नाम

    से भी जाना जाता था।

     

    ईसा के बपतिस्मा की याद करते हुए प्रकटीकरण पर्व में हमारे पूर्वज कुछ निष्चित जलाषयों में

    धार्मिक स्नान किया करते थे। इसलिए प्रकटीकरण पर्व को ‘राक्कुली पर्व’

    (रात में होनेे वाला स्नान) नाम भी रखा गया।

     

    ईष-पुत्र को पहचान कर योहन बपतिस्ता ने ईसा को ‘संसार के पाप हरने वाले ईष्वर के मेमने’ के रूप में प्रकट किया। हमारे जीवन का प्रकाष और षक्ति मान कर ईसा को हम अनुभव

     

    हम प्रार्थना करें

     

    हे मसीह, ईष-पिता से आप को यह साक्ष्य मिला कि

    ‘यह मेरा प्रिय पुत्र है’; मुझे यह अनुग्रह प्रदान कीजिए कि मैं आपको

    अपना गुरु और ईष्वर मान कर स्वीकार करूँ।

     

    हम गायें

    गीत

     

    तू जीवनदायी जल है, तू ही जीवन सोता है

                    प्रभुजी तेरा बपतिस्मा, मनुज को स्वर्ग पहुँचाता

                    हमको वरदान वह देता, वह है सच्चा जल सोता।

                    बपतिस्मा से नर सारे, प्रभु के बच्चे बन जाते

                    प्रभु निज करुणा में उनको, त्रित्व के भेद भी प्रकटाते।।

     

    ज्ञान स्नान के माध्यम से, हम को मिलता देव स्नान

    स्वर्ग कवा हमारे लिए, स्वर्ग जाने को खुल देते

    इक दिन जार्दन नदी में ही, येषु ने जब दीक्षा लिया

    त्रित्व का पावन रहस्यों को, हम लोगों को ज्ञात हुए।।

     

    हम ईश - वचन पढ़े और वर्णन करें

    योहन 1: 29-34

     

    मार्गदर्षन के लिए एक पवित्र वचन

     

    ‘‘संसार की ज्योति मैं हूँ, जो मेरा अनुसरण करता है,

    वह अन्धकार में नहीं भटकता रहेगा’’ (योहन 8: 12)।

     

    हम करें

     

    ोहन 1: 35 -49 पढ़ कर उन षिश्यों के नाम खोजकर लिखिये जिन्होंने योहन के

    साक्ष्य के बाद ईसा का अनुसरण किया।

     

    ेरा निर्णय

     

    योहन बपतिस्ता की तरह मैं भी दूसरों से

    ईसा का परिचय करा दूँगा/गी।