पाठ 5
विमोचक मूसा
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गलीलिया के काना में एक विवाहोत्सव था। ईसा की माॅँ वहाँ मौजूद थीं; ईसा और उनके षिश्य विवाहोत्सव में आमंत्रित थे। प्रीतिभोज के दौरान घर में हलचल मच गयी। अंगूरी का खत्म होना उनकी व्याकुलता का कारण था। यहूदियों के विवाहोत्सव का मुख्य पेय थी अंगूरी। उसका खत्म होना उनके लिए बडी अपमानजनक बात थी। घरवालों की यह मुसीबत जानकर माता मरियम ने ईसा के पास जाकर कहा, ‘‘उन लोगों के पास अंगूरी नहीं रह गयी है।’’ ईसा ने उत्तर दिया, ‘‘भद्रे, इससे मुझको और आपको क्या ?अभी तक मेरा समय नहीं आया है’’ (योहन 2ः3-4)। फिर भी ईष्वर के पुत्र में पूरा विष्वास करके माता ने सेवकों से कहा,
‘‘वह तुम लोगों से जो कुछ कहें वही करना।’’ माता का निवेदन मानकर ईसा ने चमत्कार दिखाया। वहाँ यहूदियों के षुद्धीकरण के लिए पत्थर के छः मटके रखे थे। उनमें पानी भरने के लिए ईसा ने सेवकों से कहा। सेवकों ने उन्हें लबालब भर दिया। ईसा के कहने पर जब उन्होंने वह निकाल कर प्रबन्धक को दिया तब उन्हें वह बढ़िया अंगूरी लगी। अपना महत्व प्रकट करने के लिए ईसा द्वारा दिखाए गए चमत्कारों का आरंभ था यह। इससे उनके षिश्यों ने उनमें विष्वास किया। (योहन 2: 1-11)
आँधी को षांत करता है
दूसरे अवसर पर ईसा अपने षिश्यों के साथ एक नाव में गलीलिया सागर के उस पार जा रहे थे। ईसा दुम्बाल में तकिया लगाये सो रहे थे। कुछ दूर आगे चलने पर एकाएक झंझावात उठा। लहरें इतने जोर से नाव से टकरा रही थीं कि वह पानी से भरी जा रही थी। भयभीत होकर षिश्यों ने ईसा को जगाकर कहा, ‘‘गुरुवर, हम डूब रहे हैं! क्या आपको इसकी कोई चिन्ता नहीं?’’ वह जाग गये और उन्होंने वायु को डाँटा और समुद्र से कहा, ‘‘षान्त हो ! थम जा !’’ तुरन्त वायु मन्द हो गयी, समुद्र षांत हो गया। ईसा ने षिश्यों से पूछा, ‘‘तुम इस प्रकार क्यों डर जाते हो, क्या तुम्हें अब तक विष्वास नहीं है ?’’ षिश्य तो भयभीत हो गये और उन्होंने प्रभु की महिमा गायी, वे कहने लगेः ‘‘आखिर यह कौन है ?वायु और समुद्र भी इनकी आज्ञा मानते हैं’’ (मारकुस 4: 35 - 41)। इस दृश्टान्त से यह स्पश्ट हो जाता है कि अगर ईसा हमारे साथ हैं तो जीवन की यात्रा में कोई भी मुसीबतें आ जायें तो भी हम नहीं टूट जायेंगे।
बेथेस्दा में रोग-षांति
यहूदियों के एक पर्व के अवसर पर ईसा येरुसालेम गये। येरुसालेम में भेड़-फाटक के पास एक कुण्ड है, जो इब्रानी भाशा में बेथेस्दा कहलाता है। उसके पाँच मण्डप हैं। उनमें बहुत से रोगी - अन्धे, लँगडे़ और अर्धांगरोगी - पड़े हुए थे। वहाँ एक मनुश्य था, जो अड़तीस वर्शाें से बीमार था। ईसा ने उसे वहाँ पड़ा हुआ देखा और, यह जानकर कि वह बहुत समय से इसी तरह पड़ा हुआ है, उससे कहा, ‘‘क्या तुम अच्छा हो जाना चाहते हो ?’’ रोगी ने कहा, ‘‘महोदय, मेरा कोई नहीं है, जो पानी के लहराते ही मुझे कुण्ड में उतार दे। मेरे पहुॅँचने से पहले ही पानी में और कोई उतर पड़ता है।’’ ईसा ने उससे कहा, ‘‘उठकर खड़े हो जाओ; अपनी चारपाई उठाओ और चलो।’’ उसी क्षण वह अच्छा हो गया और अपनी चारपाई उठाकर चलने-फिरने लगा (योहन 5: 1-15)। ईसा ने ईष्वर के पुत्र के रूप में अपना महत्व इस चमत्कार द्वारा प्रकट किया।
लाज़रुस को जीवनदान
लाज़रुस का जीवनदान एक अन्य घटना थी जिससे ईसा ने अपनी ईष्वरीय महिमा प्रकट की । ईसा का खास दोस्त था लाज़रुस - मरथा और मरियम का भाई । एक बार वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। लाजरुस की बहिनों ने ईसा को खबर भिजवायी; लेकिन ईसा दो दिन के बाद ही बथानिया चले। वे जानते थे कि वह रोग ईष्वर की महिमा के लिए है तथा उसके द्वारा ईष्वर का पुत्र महिमान्वित होगा। जब ईसा और षिश्य बेथानिया पहुँचे, वह लाजरुस की मृत्यु का चैथा दिन था। ईसा को देखते ही मरथा दौडती हुई आई और बोली, ‘‘प्रभु, यदि आप यहाँ होते, तो मेरा भाई नहीं मरता और मैं जानती हूँ कि आप अब भी ईष्वर से जो कुछ माँगेंगे, ईष्वर आपको वही प्रदान करेगा’’। ईसा ने उससे कहा, ‘‘तुम्हारा भाई जी उठेगा।’’ लेकिन मरथा ने सोचा कि ईसा अंतिम दिन के पुनरुत्थान के बारे में कह रहे थे। तब ईसा ने स्पश्ट रूप से कहा, ‘‘पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझमें विष्वास करता है वह मरने पर भी जीवित रहेगा। और जो मुझमें विष्वास करते हुए जीता है, वह कभी नहीं मरेगा।’’ मरथा ने यह कह कर अपना विष्वास प्रकट किया कि ‘ईसा वह मसीह, ईष्वर के पुत्र हैं जो संसार में आनेवाले थे’।ईसा उस कब्र के पास पहॅँुचे जहाँ लाज़रुस को दफनाया गया था। ईसा ने कहा, ‘‘पत्थर हटा दो।’’ मरथा ने उनसे कहा, ‘‘प्रभु, अब तो दुर्गन्ध आती होगी। आज चैथा दिन है।’’ ईसा ने उसे उत्तर दिया, ‘‘क्या मैंने तुमसे यह नहीं कहा कि यदि तुम विष्वास करोगी, तो ईष्वर की महिमा देखोगी ?’’ इस पर लोगों ने पत्थर हटा दिया। ईसा ने आँखें उठाकर पिता से प्रार्थना करने के बाद ऊँचे स्वर में पुकारा, ‘‘लाज़रुस, बाहर निकल आओ।’’ तब लाज़रुस ज़िन्दा बाहर आया। यहूदियों में से बहुत लोगों ने ईसा में विष्वास किया। (योहन 11: 1-44) इन सब चमत्कारों द्वारा ईसा अपनी ईष्वरीय महिमा प्रकट कर रहे थे। उन लोगों की तरह, जिन्होंने ईसा के चमत्कारों को देखकर उनमें विष्वास किया, ठीक उसी तरह हम भी ईसा में विष्वास करें तथा उनकी महिमा दूसरों को सुनायें।हम प्रार्थना करें
हे प्रभु, आपने माता मरियम की विनती पर काना में पानी को
दाखरस में बदल दिया; जीवन की कठिनाइयों तथा कमियों में
आपमें आसरा रखकर जीना हमें सिखाइए।
हम गायें
गीत
बहुतेरे चमत्कार लिए, चिह्न तथा सामथ्र्य लिए
सुत ईष्वर भू पर आया, उन्नत महिमा/प्रकटायी।।
स्तुति हो पिता की, पुत्र और पावन आत्मा की
जय जय गायें होंठ सभी, जीभ के दाता प्रभुजी की
जय-जय गायें सूनु की, जीवन के चिर/स्रोतस की।।
कविता
चिन्ह और अत्भृत ईष सूनु, निरवधी दिखाये देव सुनू
इसके द्वारा ईष राज्य का, नूतन संदेष प्रकट हुआ
निरूपम षांति प्रकटित है, परिमल सुगंध फैलाया
पाहन यह संदेष सुना, हम और भूमि घोशित करें।
ईशवचन पढ़े और वर्णन करें
योहन 11: 1 - 44
मार्गदर्शन के लिये एक पवित्र वचन
‘‘पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ। जो मुझमें विष्वास करता है,
वह मरने पर भी जीवित रहेगा।’’ ;योहन 11: 25)
हम करें
ईसा द्वारा किये हुए चमत्कारों को देखकर लोगों ने ईष्वर की महिमा गायी।
उनका वर्णन सुसमाचारों में है। उन्हें ढूँढ निकालिये और उनमें से पाँच के नाम लिखिये।
मेरा निर्ण
दैनिक जीवन की विजय और पराजय में
मैं ईष्वर पर मन लगाऊँगा/गी।