• मानव की मुक्ति हेतु ईश्वरीय योजना में इब्राहीम का विशेष स्थान है । बाइबिल के प्रथम ग्रन्थ उत्पत्ति में इब्राहीम के विष्य में विवरण है। वे ईसापूर्व उन्नीसवीं शताब्दी में जीते थे। उनका जन्म दक्षिण मेसोपोटामिया के ऊर में थाउनका नाम पहले अब्राम था। वे जाति से ग्वाल थे। उनकी जाति के लोग कहीं भी स्थिर नहीं रहते थे। पशु चराने के लिए अच्छी जगह की तलाश में वे अपनी जगह बदलते रहे। इस तरह अब्राम का परिवार हारान नामक जगह में रहने लगा।

     

    ईश्वर का बुलावा

     

    हारान में रहते समय अब्राम को ईश्वका बुलावा प्राप्त हुआ। ईश्वर ने अब्राम से कहा, "अपना देश, अपना कुटुम्ब और अपने पिता का घर छोड दो और उस देश जाओ, जिसे मैं तुम्हें दिखाऊँगा। मैं तुम्हारे द्वारा एक महान राष्ट्र उत्पन्न कराँगा, तुम्हें आशीर्वाद दूँगा और तुम्हारा नाम इतना महान बनाऊँगा कि वह कल्याण का स्रोत बन जायेगा ... तुम्हारे द्वारा पृथ्वी भर के वंश आशीर्वाद प्राप्त करेंगे” (उत्पत्ति 12:1-3) ।

     

    ईश्वर के निर्देशानुसार अब्राम निकल गये। तब वे 75 साल के थे। अब्राम कनान देश के सिखेम में मोरे के बलूत के पेड़ तक पहुँचे। वहाँ ईश्वर ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, "मैं यह देश तुम्हारे वंशजों को प्रदान करूँगा” (उत्पत्ति 12:7) । अब्राम ने वहाँ एक वेदी बनाकर प्रभु के लिए बलि चढ़ाई।

     

    अब्राम ने अपनी यात्रा जारी रखी। वे जहाँ–जहाँ जा बसे वहाँ पर प्रभु के लिए वेदी बनाकर बलि ढ़ाया करते थे। इस तरह कई साल बीत गये। अब्राम और उनकी पत्नी साराय वृद्ध हो चले थे।

     

    ईश्वर का विधान

     

    ब अब्राम निन्यानबे वर्ष के थे तब प्रभु ने उन्हें दर्शन देकर कहा, “मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर हूँ। तुम मेरे सम्मुख निर्दोष आचरण करते चलो। मैं तुम्हारे लिए अपना विधान निर्धारित करूँगा... तुम्हारे लिए मेरा विधान इस प्रकार है - तुम बहुत से राष्ट्रों के पिता बन जाओगे। अब से तुम्हारा नाम अब्राम नहीं, बल्कि इब्राहीम होगा, क्योंकि मैं तुम्हें बहुत से राष्ट्रों के पिता बनाऊँगा। तुम्हारे असंख्य वंशज होंगे।... मैं तुम्हारे लिए और तुम्हारे बाद तुम्हारे वंशजों के लिए पीढ़ी दर पीढ़ी अपना चिरस्थायी विधान निर्धारित करूँगा । मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाद तुम्हारे वंशजों का ईश्वर होऊँगा। मैं तुम्हें और तुम्हारे बाद तुम्हारे वंशजों को वह भूमि प्रदान करूँगा जिसमें तुम निवास करते हो, अर्थात कनान का समस्त देश। उसपर सदा के लिए तुम लोगों का अधिकार होगा । और मैं तुम्हारे वंशजों का ईश्वर होऊँगा (उत्पत्ति 17:1-8) ।

     

    इस प्रकार ईश्वर ने इब्राहीम के साथ एक विधान स्थापित किया। ईश्वर के समक्ष इब्राहीम को एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी आ गयीउसके प्रतीक के रूप में उसका नाम भी बदला गया। ‘इब्राहीम' नाम का अर्थ है "बड़ी जनता के पिता

    ईश्वर ने आदेश दिया कि इब्राहीम और उनकी सन्तानों को ईश्वर के साथ एक विशेष संबंध रखना होगा।

     

    ईश्वर की प्रतिज्ञा

     

    ईश्वर ने अपने विधान द्वारा तीन प्रतिज्ञाएँ इब्राहीम को दीं -

     

    - (1) इब्राहीम अनेक राष्ट्रों के पिता होंगे।

     (2) ब्राहीम और उनके वंशजों का ईश्वर के साथ विशेष संबंध होगा

    (3) इब्राहीम और उनके वंशजों को सारे कनान देश पर अधिकार प्राप्त होगा

     

    ये तीनों समय पर पूरे होते हैं। इस का आधार ईश्वर की प्रतिज्ञा ही थी ।

     

    सहाक का जन्म

     

    ईश्वर ने इब्राहीम से कहा, “तुम अपनी पत्नी को सारय नहीं, बल्कि सारा कहकर पुकारो। मैं उसे आशीर्वाद दूँगा और वह तुम्हारे लिए पुत्र प्रसव करेगी। मैं उसे आशीर्वाद दूँगा - वह राष्ट्रों की माता बन जायेगी ... तुम्हारी पत्नी सारा तुम्हारे लिए पुत्र प्रसव करेगी। तुम उसका नाम इसहाक रखोगे। मैं उसके और उसके वंशजों के लिए अपना चिरस्थायी विधान बनाये रहूँगा” (उत्पत्ति 17:15-19) ।

     

    इब्राहीम जब कनान देश के मामरे की घाटी में रहते थे ब तीन देवदूतों ने उसे दिखाई देकर यह संदेश दिया कि उनकी पत्नी सारा से एक पुत्र जन्म लेगा। ईश्वर के प्रतिज्ञानुसार वृद्ध इब्राहीसे गर्भवती होकर सारा ने एक पुत्र को जन्म दिया । इब्राहीम ने सारा से उत्पन्न अपने पुत्र का नाम इसहाक रखा (उत्पत्ति 21:1-3) |

     

    हम प्रार्थना करें

     

    चखकर देखो कि प्रभु कितना भला है।

    धन्य है वह जो उसपर आश्रय रखता है।

     

    हम गायें

     

    जनताओं का पिता महान

    जित मानस है अब्राहम

    हागार से हो इसमाइल

    साराय से हो सुत इसहाक।।

    गगनी ताराओं के समान

    सागर किनारी रेती समान

    आवनी में हो तेरी संतान

    प्रभु ईश्वर का है यह वरदान।।

    इक दिन माँगा ईश्वर ने

    परम प्रिय सुत का ही बलिदान

    मोरिया गिरि पर होम समान

    बचाया अंत में दान समान।।

     

    श वचन पढ़े और वर्णन करें

     

    इसहाक को बलि चढ़ाने के लिए इब्राहीम के तैयार होने

    की घटना (उत्पत्ति 22:1-18) ।

     

    मार्गदर्शन के लिये एक पवित्र वचन

     

    “इब्राहीम ने ईश्वर में विश्वास किया और

    इस कारण प्रभु ने उसे धार्मिक माना” (उत्पत्ति 156) ।

     

    हम करें

     

    चित्र में निम्नलिखित जगह अंकित कीजिए - मोरिया पहाड़, ऊर, हारान

     

    मेरा संकल्प

     

    इब्राहीम के जैसे मैं भी ईश्वर में विश्वाकरते हुए,

    उनके आदेशों का पालन करते हुए जिऊँगा/गी।

     

    इब्राहीम की बलि

    एक बार ईश्वर ने इब्राहीम की परीक्षा लेने का निर्णय लियाउसने इब्राहीम को बुलाकर कहा, "अपने पुत्र को, अपने एकलौते को, परमप्रिय इसहाक को साथ ले जाकर मोरिया देश जाओ। वहाँ, जिस पहाड़ पर मैं तुम्हें बताऊँगा, उसे बलि चढ़ा देना” (उत्पत्ति 22:2) ।

    इब्राहीम ने ईश्वर की आज्ञा मानने का निर्णय लिया | होमबलि के लिए सब कुछ तैयार कर दिया। वे इसहाक को साथ लेकर चल दिए। रास्ते में इसहाक ने पूछा, “देखिए, आग और लकड़ी तो हमारे पास है, किन्तु होम का मेमना कहाँ है ?" ब्राहीम ने उत्तर दिया, "ईश्वर होम के मेमने का प्रबन्ध कर देगा” (उत्पत्ति 22:7-8) ।

    जब वे उस जगह पहुँच गये, जिसे ईश्वर ने बताया था, तो इब्राहीम ने वहाँ एक वेदी बना ली और उस पर लकड़ी सजायी। उसके बाद उन्होंने इसहाक को बाँध कर वेदी पर लिटाया। फिर अपने पुत्र को बलि चढ़ाने के लिये छुरा उठा लिया। किन्तु उसी क्षण प्रभु का दूत स्वर्ग से उसे पुकारकर बोला, बालक पर हाथ नहीं उठाना, उसे कोई हानि नहीं पहुँचाना। अब मैं जान गया कि तुम ईश्वर पर श्रद्धा रखते हो - तुमने मुझे अपने पुत्र, अपने एकलौते पुत्र, को भी देने से इनकार नहीं किया।" इब्राहीम ने आँखें ऊपर उठायीं और सींगों से झाड़ी में फंसे हुए एक मेढ़े को देखा। उसे इसहाक के बदले बलि चढ़ा दिया (उत्पत्ति 22:9-13) ।

     

    राष्ट्रों के पिता

     

    ईश्वर की परीक्षा में इब्राहीम विजयी हुए। इब्राहीम से संप्रीत होकर ईश्वर ने उनसे कहा, "तुमने मेरी आज्ञा का पालन किया है, इसलिए तुम्हारे वंश के द्वारा पृथ्वी के सभी राष्ट्रों का कल्याण होगा” (उत्पत्ति 22:18) । इस प्रकार इब्राहीम ईश्वर द्वारा चुने जाने वाले सभी राष्ट्रों के पिता बन गए। सारी दुनिया को मुक्ति प्रदान करने की ईश्वरीय योजना में इब्राहीम ने सहयोग दिया और वे अनेक राष्ट्रों के पिता बन गए।

     

    विश्वासियों के पिता

    ईश्वर में अटल विश्वास रखने के कारण ही इब्राहीम विश्वासियों के पिता बने । उनका सारा जीवन ईश्वर में उनके अचंचल विश्वास की कहानी है। इस विश्वास के कारण ही वे अपना देश, अपने प्रियजनों को छोड़कर ईश्वर द्वारा दिखाये गये देश की ओर जाने के लिए तैयार हो गये। वृद्धावस्था में अपने लिए पुत्र का जन्म होने की बात असंभव लगने पर भी इब्राहीम ने ईश्वर की प्रतिज्ञा पर विश्वास किया।

    जब इकलौते पुत्र इसहाक को बलि चढ़ाने के लिए कहा गया, तो वह बहुत कठिन बात थी; फिर भी ईश्वर की इच्छा जो भी है, उसमें विश्वास करते हुए उसकी पूर्ति करने के लिए इब्राहीम तैयार हो गये। इससे संतुष्ट होकर ईश्वर ने उनको महान अनुग्रह प्रदान किये। जब विश्वास डाँवाडोल होने की स्थिति में आया तब भी इब्राहीम ने अपना अटल विश्वास करनी में प्रकट किया। इस प्रकार वे विश्वासियों के पिता बन गये।

    इब्राहीम हमारे भी, जो ईश्वर में और ईश्वर के पुत्र ईसा में विश्वास करते हैं, पिता हैं। विश्वास–जीवन का वे एक उत्तम नमूना हैं। विश्वास की परीक्षा होने के अवसर हमारे जीवन में भी आ सकते हैं। उस समय हमें भी ईश्वर पर हमारा अटल विश्वास कथनी में और करनी में प्रकट करना चाहिए। इब्राहीम की जीवनकथा हमें