• इस्राएलियों ने मिस्र देश से कनान देश कीओर की अपनी यात्रा जारी रखी। मूसा उनका अगुआ था। लम्बे समय की यात्रा के बाद वे सीनई मरुभूमि पहुँचे ।उन्होंने सीनई पहाड़ के सामने पड़ाव डाला।

     

    ईश्वर सीनई पर्वत के ऊपर उतरे और उन्होंने मूसा को पर्वत के ऊपर बुलाया और मूसा ऊपर गया।

     

    तब ईश्वर ने कहा: तुम नीचे उतर कर इस्राएली जनता को यह बता दोगे कि तुम लोगों ने स्वयं देखा है कि मैंने कितने महान चमत्कार करते हुए मिस्र की गुलामी से तुम्हें बचाया। मैंने मिस्र के साथ क्या-क्या किया और मैं किस तरह तुम लोगों को गरुड़ के पंखों पर बैठा कर यहां अपने पास ले आया। इसलिए यदि तुम मेरी बात मानोगे और मेरे विधान के अनुसार चलोगे तो तुम सब राष्ट्रों में से मेरी अपनी प्रजा बन जाओगे (निर्गमन 19:4-5)।

     

    मूसा ने पर्वत से उतरकर प्रजा के नेताओं को बुलाया और जो कुछ प्रभु ने उससे कहा था वह सब जनता को सुनाया। तब लोगों ने एक स्वर से यह उत्तर दिया: ईश्वर जो कुछ कहते हैं हम वह सब पूरा करेंगे। मूसा ने प्रभु को लोगों का यह उत्तर सुना दिया। मूसा से बात करने के बाद ईश्वर ने पत्थर की दो पाटियों पर दस आज्ञायें लिखकर मूसा को दी। ईश्वर की दी हुई इन आज्ञाओं को ईश्वर की आज्ञायें या दस आज्ञायें कहते हैं। ये आज्ञाएं नीचे दी गयी हैं।

     

    1. मैं प्रभु तुम्हारा ईश्वर हूँ।

    मेरे सिवा तुम्हारा कोई ईश्वर नहीं होना।

    1. प्रभु अपने ईश्वर का नाम व्यर्थ नहीं लेना।

    2. विश्राम दिन को पवित्र मानना।

    3. माता- पिता का आदर करना।

    4. हत्या मत करना

    5. व्यभिचार मत करना

    6. चोरी मत करना

    7. झूठी गवाही मत देना

    8. पर स्त्री की कामना न करना।

    9. दूसरों की वस्तुओं का लालच न करना।

     

    इन दस आज्ञाओं को दो बड़ी आज्ञाओं में समावेश कर सकते हैं -

     

    1. तुम अपने प्रभु ईश्वर को अपने सारे हृदय, अपनी सारी आत्मा और अपनी सारी बुद्धि से प्यार करो।

    2. तुम अपने पड़ोसी को अपने समान प्यार करो।

     

    जीवन की ओर की राहें हैं ईश्वर की आज्ञायें। हमें इन आज्ञाओं का पालन करते हुए जीना चाहिये। तभी हम ईश्वरीय जीवन में बढ़ सकेंगे। स्वर्गराज्य को लक्ष्य बनाकर हमारी यात्रा में सही मार्गदर्शन देने में आज्ञाएँ सहायक हैं। सफर के दौरान आपने रास्ता दिखाने वाले संकेत चिन्ह देखे होगे ? इसी तरह आज्ञाएँ हमें यह सिखाती हैं कि हमें अपने जीवन में क्या-क्या करना चाहिये और क्या-क्या नहीं। उन्हें सीखते हुए और उनका पालन करते हुए हम जीवन कीओर की राहों पर ही चलें।

     

    हम प्रार्थना करें

     

    हे प्रेमी पिता ईश्वर,आपने इस्राएली लोगों को

    आज्ञाएँ दीं, मुझे आपकी आज्ञाओं का पालन करते हुए

    जीवन जीने की कृपा प्रदान कीजिए।

    हम गाएं

    ईश्वर सीनई पर्वत उतरा

    प्यार का विधान स्थापित किया

    मेरा विधान मानोगे तो

    तुम मेरे जन बन जाओगे।

    ईश्वर ने दस आज्ञाएँ दीं

    मार्ग मानव की रक्षा के

    हम सब पालन करते

    इनकी मंजिल पावें इस जीवन की

    कंठस्थ करें

    दस आज्ञाएँ

    शब्द पहेली

    मुझे पहचानों

     

    ईश्वर के प्यार का तोहफा हूँ मैं

    सीनई पर्वत पर दिया गया मैं

    दस आदेश मुझमें हैं मेरा नाम तुम बताओ।

     

    मेरा निर्णय

     

     

    मैं सदा ईश्वर की आज्ञायें मानकर जिऊँगा/गी।