पाठ 3
मानव ईश्वर से दूर हुवा
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प्रेमी पिता ईश्वर ने आदम और हेवा को बहुत प्यार किया | उन्हें सब प्रकार के सुख से भरी अदन वाटिका प्रदान की | उन्होने ईश्वर के साथ ही साथ से जीवन बिताया | (उतपत्ति 2 :8)
ईश्वर ने आदम और हेवा से यह कहा था कि वाटिका के सब वृक्षों के फल खा सकते हैं | परंतु वाटिका के बीचों बीच स्थित भला - बुरा जानने वाले वृक्ष के फल मत खाना | (उतपत्ति 2 :16 - 17)
बाद में क्या हुआ, जानते हैं ? चित्रों को देखिए।
शैतान ने देखा कि आदम और हेवा अदन वाटिका में खुशी के साथ रहते हैं। यह जानकर शैतान का मन द्वेष से जलने लगा। "शैतान झूठा और झूठ का पिता है” (योहन 8:44) । शैतान एक दिन साँप के रूप में हेवा के पास आया और हेवा को प्रलोभित किया कि वह उस वृक्ष का फल खाये जिसे ईश्वर ने खाने के लिए मना किया था।
हेवा बोलीः ईश्वर ने कहा है कि वह फल खाने से हम अवश्य मर जाएँगे, लेकिन शैतान ने कहाः उस वृक्ष का फल स्वादिष्ट है और वह दिखने में सुन्दर भी है। उसे खाने से आप लोग ईश्वर जैसे बनेंगे। हेवा फलों की तरफ देखती रही। दिखने में वह फल अच्छा लगता था। उसे तोड़ कर खाने की इच्छा बढ़ गयी। हेवा ने फल तोड़ा और खाया। अच्छा स्वाद । मीठा लगा। उसने एक फल आदम को भी दिया।
आदम ने भी खाया।
इस प्रकार हेवा और आदम ईश्वर को भूल गये।
ईश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया।
ईश्वर के प्रेम का तिरस्कार किया।
उन्होंने पाप किया।
पहले जैसे जब ईश्वर अदन वाटिका में टहलने आये तब आदम और हेवा नही मिले। उन्होंने ईश्वर की आज्ञा का पालन नहीं किया | इसलिए वे ईश्वर के सामने
आने से डर गए।
अपने माता-पिता की आज्ञा को नहीं मानने पर आप लोगों को कैसा लगेगा ? डर लगेगा कि नहीं ? आदम और हेवा डर लगने के कारण प्रभु ईश्वर से अलग होकर वाटिका के वृक्षों के बीच छिप गए ।
पाप करने पर
हम ईश्वर से दूर हो जाते हैं।
हुम गायें
आज्ञाओं को ईश्वर की
पहले मानव ने तोडा
उपस्थिति में ईश्वर की
पापी बन वे जीने लगे
ईश्वर की पग-आवाज़ को
अदन बाग में सुनते ही
आदम हेवा डरते हैं
जल्दी से वे छिपे हैं।
अलग अलग रंग दे कर हम दोबारा लिखें:
मैं ईश्वर को मानूँगा/गी |
शब्द चुनकर पूरा लिखियेः
मैं किन किन लोगों को मानूँगा/गी?
मैं ईश्वर को मानूंगा। पुरोहितों को।
मैं माता-पिता को।
मैं शैतान को।
मैं गुरुजनों को।
हम प्रार्थना करें
हे ईश्वर, आप दयालु हैं,
मुझ पर दया कीजिये।
आप दया सागर हैं,
मेरा अपराध क्षमा कीजिये। (स्तोत्र 51:1)
मेरा फैसला
मेरे माता-पिता ने जो कार्य करने को मना किया है।
उसे मैं कभी नहीं करूंगा/करूँगी ।