• "ईसा उनके सभागृहों में शिक्षा देते, राज्य के सुसमाचार का प्रचार करते और लोगों की

    हर तरह की बीमारी और दुर्बलता दूर करते हुए, सारी गलीलिया में घूमते रहते थे”। (मत्ती 4:23)

    ईसा के उपदेश सुनने, रोगों से मुक्ति पाने बहुत से गरीब और रोगी लोग उनके चारों ओर आते थे।

    उनको देखकर ईसा को तरस आया और ईसा ने उन्हें चंगा किया, मृत लोगों को जिलाया।

    एक दिन एक कोढ़ी ने चंगाई पाने के लिए ईसा के पास आकर प्रार्थना की।

    ईसा ने बड़ी दयालुता के साथ हाथ बढ़ाकर उसका स्पर्श किया और वह

    चंगा हो गया। (लूकस 5:13)

     

    दूसरे अवसर पर एक अध्र्दाग रोगी को लोग ईसा के पास लाए। इतने लोग इकट्ठे हो गये कि द्वार के सामने जगह नहीं थी। वे छत पर चढ़े, और उन्होंने खपरा निकालकर, चारपाई के साथ उसे नीचे उतारा। उनका विश्वास देख कर ईसा ने कहाः

     

    "बेटा, ढ़ारस रखो! तुम्हारे पाप क्षमा हो गये हैं...

    तुम अपनी खाट उठाकर घर जाओ।

    और वह उठकर अपने घर चला गया।"

     

    (मत्ती 9:2,6)

    ईसा एक दिन यरीखो से निकल रहे थे। तब दो अन्धे रास्ते के किनारे बैठकर चिल्ला रहे थे, "हे ईसा, दाऊद के पुत्र, हम पर दया  कीजिए।" ईसा को तरस हो आया और उन्होंने उनकी आखों का स्पर्श किया और वे चंगे हो गये। ईसा जहाँ कहीं भी गये लोग उनके पास रोगियों को लाये। उन्होंने तरस खाकर उन्हें चंगा कर दिया ।

    (मत्ती 20:29-34)

     

    ईसा करुणावान हैं। दुःखियों पर ईसा दया दिखाते हैं। ईसा इस दुनिया में हमारे दर्द मिटाने आये हैं। ईसा जिस प्रकार करुणावान थे उसी प्रकार हम भी दुःखित लोगों के प्रति करुणावान बनें। ईसा चाहते हैं कि हम प्रेममय और करुणामय बनें। ईसा कहते है:

     

    "अपने स्वर्गिक पिता जैसे दयालु बनो।” (लूकस 6:36)

     

    हम गायेंः

     

    करुणापूर्वक प्रभु कहता

    भूखों को आज भोज देता

    बंदी जनों को हमेशा का

    मोचन प्रभुवर है देता।

    अन्धजनों के नयनों को

    दृष्टि-प्रदाता प्रभुवर है

    ऊपर उठाता दीनों को

    उसको जानो प्रभुवर है।

     

    हम प्रार्थना करें

     

    हे मेरी आत्मा, प्रभु को धन्य कह

    और उसका एक भी वरदान कभी नहीं भुला।

    वह तेरे सभी अपराध क्षमा करता है और

    तेरी सारी दुर्बलतएँ दूर करता है। (स्तोत्र 103:2–3)



     

    निम्न लिखित घटना का विवरण कीजिए।

     

    1. "हे दाऊद के पुत्र, हम पर दया कीजिए।”

    2. "अपनी खाट उठाकर घर जाओ।”

    चित्रों को पहचानियैः

     

    हम अनुकरण करें

     

    जैसे ईसा ने दुःखी लोगों को सांत्वना दी और उन

    पर करुणा बरसायी, वैसे मैं भी दुःखी लोगों को

    सांत्वना दूंगा/देंगी और उनके प्रति करुणा दिखागाँ/गी।