• ईसा जहाँ कहीं भी जाते थे वहाँ बहुत से लोग उनके पीछे आया जाया करते थे। एक दिन लोगों की भीड़ को देखकर ईसा पहाड़ पर चढ़कर वहाँ बैठे। लोग ईसा के चारों ओर बैठ गये। उन गरीब लोगों पर ईसा को तरस आया और व लोगों को शिक्षा देने लगेः

    धन्य हैं वे जो दयावान हैं, उनको दया मिलेगी; धन्य हैं वे जिनका हृदय निर्मल है, वे ईश्वर के दर्शन पायेंगे और धन्य हैं वे जो धार्मिक

    कार्य करते हैं, उनको स्वर्गराज्य मिलेगा।

    ऐसी बातें ईसा ने लोगों को सिखायीं।

    ईसा के प्रबोधन के संग्रह को आशीर्वचन कहते हैं।

    (मत्ती 5:3–12)

     

     

    ईसा ने यह भी सिखाया - अपने मित्रों से प्रेम करो, इतना ही नहीं बल्कि अपने शत्रुओं से भी प्रेम करो। जो हमें सताते हैं। उनको कैसे माफी देनी चाहिए-इस बात को समझाने के लिए ईसा ने सिखायाः

    "यदि कोई तुम्हारे दाहिने गाल पर थप्पड मारे, तो दूसरा भी

    उसके सामने कर दो।” (मत्ती 5:39)

     

    ईसा ने लोगों को जो प्रार्थना सिखायी उसे प्रभु की विनती कहते हैं। इस प्रार्थना में हम ईश्वर को “हे हमारे पिता जो स्वर्ग में है” ऐसे संबोधित करते हैं। जीवन में किसी भी बात को लेकर दुःखी नहीं होना चाहिये, सिर्फ ईश्वर के परिपालन पर विश्वास करना चाहिए।

    आकाश के पक्षियों का पालन करने वाले और खेतों की घास का संरक्षण करने वाले प्यारे ईश्वर हम मनुष्यों को हर पल संभालते हैं। इस प्रकार का  सुसमाचार प्रेमी सद्गुरु ईसा ने लोगों को सुनाया।

     

    ईसा जगत गुरू

     

    ईसा जो बातें हमें सिखायीं और जो कार्य

    हमारे लिये किये ये सब हमें बाइबिल में मिलते हैं।

    बाइबिल द्वारा ईसा हमसे बाते करते हैं।

     

    पवित्र बाइबिल

     

    हुम गायें

     

    सुवार्ता की ज्योति से

    अन्धेरे को दूर करने

    अवतार लिये प्रभुवर को

    हाथ जोड नमन करें।

     

    हम प्रार्थना करें

     

    हे हमारे प्रेमी गुरु ईसा,

    आपके वचन के अनुसार जीने

    के लिए हमें अनुग्रह दीजिये।

    ढूँढ़ के निकालिए कि क्या किया जायेः

    यदि कक्षा में दोस्त ने आपके कपड़ों को गन्दा कर दिया तो

    आप ईसा की शिक्षा के अनुसार क्या करेंगे ?

    सही उत्तर पर (L) ऐसा चिह्न लगाइए।

     

    1. उनके साथ गुस्सा करेंगे।

    2. उन्हें क्षमा करेंगे ।

    3. उनके कपड़े भी आप गन्दे करेंगे ।

     

     

    रंग भरके दोहरायें

     

     

    ईसा हमारे प्रेमी गुरु

     

    ईसा ने क्या कहा है १ (पूरा कीजिये)

     

    क) धन्य हैं वे, जो दयालु हैं उनको-- ----------

    ख) धन्य हैं वे, जो मेल कराते हैं -------

    ग) धन्य हैं वे, जिनका हृदय निर्मल है - - - - - - -

    दया की जायेगी/ ईश्वर के दर्शन करेंगे/ ईश्वर के पुत्र कहलायेंगे।

     

    हम अनुकरण करें

     

     

    जैसे ईसा के वचन सुनने के लिए लोग दौड़ आये

    वैसे मैं भी उत्साह के साथ ईश्वर के वचन सुनूंगा।