पाठ 7
सर्वोच्च में ईश्वर की महिमा
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यहूदिया का नगर बेथलेहम । एक ठंड़ी रात। वहाँ के खेतों में कई चरवाहे पहरा दे रहे थे। प्रभु के दूत उनके पास आकर खड़े हो गये।
वे बहुत अधिक ड़र गए । एक स्वर्गदूत ने उनसे कहाः
"डरिए नहीं, देखिए, मैं आपको सभी लोगों के लिए बड़े आनन्द का सुसमाचार सुनाता हूँ। आज दाऊद के नगर में आपके मुक्तिदाता, प्रभु मसीह, का जन्म हुआ है।" (लूकस 2:10-11)
एकाएक उन्होंने दूसरा दृश्य देखा। स्वर्ग के उस दूत के साथ स्वर्गीय
सेना का विशाल समूह दिखाई दिया। उन्होंने यह कहते हुए ईश्वर की स्तुति कीः
“सर्वोच्च स्वर्ग में ईश्वर की महिमा प्रकट हो और पृथ्वी पर उसके कृपापात्रों को
शान्ति मिले।” (लूकस 2:14)
यह सुनकर चरवाहे खुशी के साथ शीघ्र ही बेथलेहम की ओर दौडे | जानते हैं वहाँ उन्होंने क्या देखा ? एक गोशाला। उसकी चरनी में लेटा हुआ एक बालक उसके पास में मरियम तथा यूसुफ। चरवाहे चले गये और उन्होंने दूसरों को भी बालक के बारे में सुनाया। कौन है यह बालक ? यह है वह मुक्तिदाता, ईसा, जिसके बारे में ईश्वर ने वादा किया था। ईसा का जन्म दो हजार वर्ष पहले हुआ। ईसा के जन्मोत्सव को क्रिसमस कहते हैं।
दिसम्बर 25 तारीख को हम
क्रिसमस मनाते हैं।
क्या आपको मालूम है, क्यों ईसा का जन्म बेथलेहम की गोशाला में हुआ ? रोमी सम्राट की आज्ञा के अनुसार यूसुफ अपनी पत्नी मरियम को जो गर्भवती थी, लेकर बेथलेहेम गया जिससे वह मरियम के साथ नाम लिखाये। रात होने पर उन्होंने सोने के लिए कमरा ढूंढा। परंतु सब जगह भीड़ होने के कारण उन्हें कहीं भी कमरा नहीं मिला। गर्भवती मरियम यात्रा के कारण थक गयी थी। अंत में वे एक गोशाला में रहे। उसी रात को ईसा का जन्म हुआ। बालक ईसा को जन्म लेने के लिए गादी, आदि नहीं थी।
गोशाला में बालक ईसा के जन्म की स्मृति में हम क्रिसमस के समय गोशाला बनाते हैं ।
दुनिया के मुक्तिदाता ईसा ने बेथलेहेम की गोशाला में जन्म लिया |
दुनिया के मुक्तिदाता ईसा विनम्र होकर एक गोशाला में जन्मा।
ईसा के समान हम भी विनम्र होकर जीवन बितायें।
स्वर्गदूतों और चरवाहों के साथ हम भी येसु की स्तुति करें ।
हम गायें
आधी रात को चरवाहे
आधी नींद में थे
सारी पृथ्वी ठंडी थी
सभी जगह था सन्नाटा।
स्वर्गीय गाना गुँजा नभ में
स्वर्गीय सेना मिल गायी
स्वर्ग को पृथ्वी में लाने में
स्वर्ग का प्रभुवर अवतारा।
हम प्रार्थना करें
हे ईसा, आप गोशाला की चरनी में जन्मे ।
मेरे हृदय में आकर जन्म लीजिए।
रंग भरकर दुहराकर लिखें
सर्वोच्च स्वर्ग में ईश्वर की महिमा
हम अनुकरण करें
जैसे स्वर्गदूतों ने बालक ईसा की स्तुति की
वैसे हम भी बालक ईसा की स्तुति करें।
बालक ईसा की फूल-गादी को रंग से सजायें:
हे मेरे बालक ईसा मैं आप को प्रेम करता हूँ ।
इस जप को बोलते हुए एक एक फूल में रंग भरें ।