• पूर्व दिशा में एक बारी थी , जो पेड़ पौधों से भरी थी | आदम और हेवा के खाने के लिए अलग - अलग प्रकार के फलदार पेड़ और पौधे उस बारी में थे | बारी के बिचों बिच से एक सुन्दर नदी बहती रहती थी |

     

    बारी के बीचों बीच दो पेड़ :

    जीवन का पेड़ और भले  - बुरे के  ज्ञान का पेड़ | (उत्पत्ति 2 :9)

     

    कितनी सुन्दर वह बारी ,थी न ? यह है अदन वाटिका | इसे स्वर्ग - वाटिका भी कहते हैं | आदम और हेवा के रहने के लिए ईश्वर ने इसे बनाया ; ईश्वर कितने प्रेमी हैं |

     

    आदम और हेवा ने ईश्वर से प्रेम करते हुए और उनकी आज्ञा मानते हुए अदन वाटिका में आनन्द का जीवन बिताया |

     

    वे ईश्वर के साथ रहते थे।

     

    उन्होंने अदन वाटिका में आनन्दपूर्वक जीवन बिताया।


     

    ईश्वर के साथ रहने पर हमें आनन्द मिलता है ।

    हमें भी यह आनन्द चाहिये, न ? उसके लिए हमें क्या करना है ?

    हमें ईश्वर के साथ ही रहना है।

    माता-पिता के साथ ही रहने से हमें आनन्द मिलता है या नहीं ? ईश्वर हम से बहुत प्यार करते हैं। ईश्वर भी हमारे साथ रहना चाहते हैं। जब हम ईश्वर को प्यार करते हुए और उन्हें मानते हुए जीवन बितायेंगे, तब हमें भी आनन्द मिलेगा।

    ईश्वर के साथ जीने पर, हमें आनन्द मिलता है,

    वह है अदन वाटिका का आनन्द।

     

    हम गायें

     

    ईश्वर के साथ ही जीयेंगे तो

    हम सब को आनन्द आ जायेगा।

    प्रेम में यदि हम सदा रहें तो

    ईश्वरीय बाग अपना हो जायेगा।

     

    ढूँढे और रंग भरें:

     

    ईश्वर के साथ रहने पर हमें क्या-क्या मिलते हैं ?

    ढूँढे और उन गुणों के ऊपर रंग भरें।

    सुख अच्छाई डर शान्ति दुःख ईर्ष्या

    खुशी भरोसा

     

    रास्ता खोजकर निकालेंः

     

    सौभाग्यों से पूर्ण है अदन वाटिका।

    वहाँ पहुँचने का रास्ता खोज कर निकालें ।

    अदन वाटिका

    हम प्रार्थना करें

     

    हे मेरे ईश्वर,

    आप मुझे प्यार करते हैं।

    आपके साथ रहने के लिए

    मुझे आशीर्वाद दीजिए।

     

     

    मेरा फैसला

     

    मैं उस ईश्वर को प्यार करूंगा/गी जो मुझे

    प्यार करते हैं। मैं उन्हें मानते हुए

    अपना जीवन बिताऊँगा / बिताऊँगी।