• मनुष्य अपने सृष्टिकर्ता ईश्वर की स्तुति हमेशा किया करता था।

    इस सुन्दर दुनिया के लिए उसने ईश्वर की स्तुति की।

    अच्छी फसल मिलने पर उसने ईश्वर का स्तुतिगान किया।

    प्रार्थना और गीतों से उसने ईश्वर की स्तुति की ।

     

    प्रभु ईश्वर की स्तुति करें

     

    इन स्वर्गदूतों के साथ मिलकर निम्नलिखित

    गीत गाते हुए हम ईश्वर की स्तुति करें :

     

    हल्लेलूया गायेंगे हम

    हल्लेलुया, हल्लेलुया

     

    हम ईश्वर की स्तुति करें। दिन प्रतिदिन उनकी स्तुति करें।

    सबेरे, शाम को, सोते वक्त, जागने पर उनकी स्तुति करें।

    सभी उपकारों के लिए उनकी स्तुति करें।

     

     

    हाथ जोड़े

     

    हे प्रभु, आपने हमें कई प्रकार के वरदानों से संपन्न किया।

    इसलिए हम आपकी स्तुति करते हैं।

    ईश्वर किस प्रकार हमारी देखभाल करते हैं ?

     

    श्वास लेने के लिए वायु, पीने के लिए पानी,

    खाने के लिए भोजन, पहनने के लिए कपड़ा, रहने के लिए मकान, पढ़ने के लिए स्कूल - दिया है।

    समझने के लिए बुद्धि और खेलने के लिए ताकत दी है।

    हंसने, गीत गाने, चित्र बनाने और नाचने के लिए हमें समर्थ बनाया है।

     

    आइए! हम इन सभी वरदानों के प्रति ईश्वर की स्तुति करें।

     

    हम गायें

     

    प्रभुवर तेरी स्तुति गाऊँ

    प्रतिदिन तेरी स्तुति गाऊँ

    महिमापूरित प्रभुवर तू

    सर्व स्तुति के योग्य है तू।

    मेरी आत्मा स्तुति गाओ

    प्रभुवर की तुम स्तुति गाओ

    जीवन भर तुम स्तुति गाओ

    प्रभुवर की तुम स्तुति गाओ।

     

     

    माला गुँथे

     

    एक सुन्दर माला गुँथे और माला की हर एक मणिका

    बनाते समय दोहरायें -

    “ईश्वर की जय हो”


     

    याद करें

     

    प्रभु की स्तुति करो, क्योंकि वह भला है।”

     

    (स्तोत्र 135:3)