• ईश्वर अपनी सारी सृष्टियों की देखभाल करते हैं।

     

    पशु-पक्षियों को ईश्वर खिलाते हैं। पौधों को उगाते हैं।

    मछलियों को संभालते हैं। मनुष्यों की देखभाल करते हैं।

     

    क्या आप इन सबको

    अपने-अपने घर पहुँचाने के

    लिए मदद करेंगे ?

     

    हम गायें

     

    ईश्वर मेरा पालन करता

    ईश्वर मेरा तारण करता

    पंख फैलाकर संभालता

    प्रेम देकर पोषण करता।

    जब मैं राह को ढूँढूंगा

    जब मैं दुःख में डूबँगा

    शक्ति पूरित हाथों से

    प्रेम के सह मुझे पालेगा।

     

    ईश्वर हम सबके पिता हैं।

    ईश्वर मेरे भी पिता हैं।

    ईश्वर मुझे अपने हाथों से संभालते हैं।

     

    हाथ जोड़ें

     

    हे मेरे प्यारे ईश्वर,

    सदा मेरी देखभाल करना !

     

    पिता का हाथ पकड़ने के लिए क्या दौड़ लगायेंगे ?

    बीच में ठोकर न खायें !

     

    याद करें

     

    वह अपने पंख फैलाकर तुमको ढक लेता है और

    अपने परों के नीचे तुम्हें संभालता है।

    (स्तोत्र 91:4)